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हादसे में किशोर की मौत, गुस्साए ग्रामीणों ने लगाया जाम

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मोहम्मदाबाद। थाना क्षेत्र के खिमसेपुर गांव में शनिवार को घर बनाने के लिए ट्यूबवेल से रिक्शे पर पानी लेकर लौट रहे किशोर को मौरंग लदे ट्रक ने टक्कर मार दी। इससे उसकी मौके पर ही मौत हो गई।
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इसके बाद हादसे से गुस्साए ग्रामीणों ने हाईवे पर जाम लगा दिया। एसडीएम और सीओ ने मुआवजा दिलाने का आश्वासन देकर किसी तरह ग्रामीणों को समझाकर जाम खुलवाया। जाम से करीब डेढ़ घंटे तक यातायात ठप रहा। पुलिस ने चालक को हिरासत में लिया है।

मोहम्मदाबाद थाना क्षेत्र के गांव खिमसेपुर निवासी किशनपाल के परिवार में पत्नी विनीता देवी व बेटे सुरजीत कुमार (16) और विकास कुमार (14) है। किशनपाल को प्रधानमंत्री आवास मिला है। इस समय उसका निर्माण चल रहा है। शनिवार को सुबह 7:30 बजे सुरजीत और विकास भवन निर्माण के लिए रिक्शे पर गांव के बाहर लगे ट्यूूबवेल से पानी लेने गए थे।
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ट्यूबवेल से लौटते समय विकास रिक्शा चला रहा था। इटावा-बरेली हाईवे पर चढ़ते ही बेवर की ओर से आ रहे मौरंग लदे ट्रक ने रिक्शा में टक्कर मार दी। सड़क पर गिरे विकास के सिर के ऊपर से ट्रक का पहिया निकल किया। इससे उसकी मौके पर ही उसकी मौत हो गई, जबकि सुरजीत बाल-बाल बचा।

हादसे के बाद गुस्साए ग्रामीणों ने शव रखकर और टूटा रिक्शा व लकड़ियां डालकर हाईवे पर जाम लगा दिया। हंगामे के साथ परिजनों ने मुआवजा की मांग की। सड़क जाम होने से कुछ ही देर में हाईवे पर दोनों ओर वाहनों की लाइनें लग गईं। करीब एक घंटे बाद एसओ मोहम्मदाबाद राजेश पाठक और सीओ मोहम्मदाबाद हजारीलाल मौके पर पहुंचे। सीओ ने लोगों का समझाकर शव और भीड़ को रोड से हटाया।

इसी बीच ग्रामीणों ने मृतक की मां विनीता को भड़का दिया। गांव में अपने घर के सामने फिर कुछ महिलाओं के साथ वह सड़क पर लेट गईं। करीब आधा घंटा तक फिर यातायात बाधित रहा। इसी बीच एसडीएम अजीत कुमार भी पहुंच गए। उन्होंने मुख्यमंत्री सहायता कोष से मुआवजा देने का प्रयास करने का आश्वासन देकर महिलाओं को सड़क से हटाया।

शव देखने की जिद करने पर पुलिस ने महिलाओं को एक लोडर से मोहम्दाबाद भिजवाया। एसओ ने बताया चालक और ट्रक कब्जे में है। चालक शिवम यादव 25 पुत्र अखिलेश यादव औरैया जिले के अहिरवा कट्टा थाना क्षेत्र के देईपुर गांव का रहने वाला है। उसने बताया कि इटावा से मौरंग लेकर मोहम्मदाबाद जा रहा था। मृतक के पिता ने थाने में तहरीर दी है।

स्कूल भेज देते तो ऐसा न होता
किशनपाल का बेटा अजय गांव के ही उच्च प्राथमिक स्कूल में कक्षा आठ में पढ़ता था। शनिवार को स्कूल खुला था लेकिन माता-पिता ने उसे और बड़े भाई सुरजीत को स्कूल न भेजकर मकान बनाने के काम में लगा दिया था। अगर अजय स्कूल चला जाता तो शायद उसकी जान न जाती।
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-करीब डेढ़ घंटे तक इटावा-बरेली हाईवे पर ठप रहा आवागमन
-एसडीएम ने मुआवजा दिलाने का आश्वासन देकर लोगों का शांत कराया
-घर बनाने के लिए रिक्शे पर पानी लेकर लौट रहा था किशोर
अमर उजाला ब्यूरो
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