फर्रुखाबाद। जिला बार एसोसिएशन के अध्यक्ष, महासचिव समेत पांच वकीलों को दस साल के लिए किए डिबार पर बार कौंसिल उत्तर प्रदेश के अध्यक्ष ने रोक लगा दी है। इस संबंध में बार कौंसिल के सचिव ने आदेश जारी कर दिया है। अब पांचों वकील अदालतों में न्यायिक काम कर सकते है। अध्यक्ष ने दोनों पक्षों को सुनने के लिए 30 मार्च केे बार कौंसिल बुलाया है। इसके लिए नोटिस जारी किया गया है।
बार एसोसिएशन के पदों पर चुुनाव के दौरान मॉडल बायलॉज का पालन न करने और बार कौंसिल के आदेशों की अवहेलना करने के मामले की वकील राजीव बाजपेई ने बार कौंसिल की विशेष अनुशासन समिति से अध्यक्ष, महासचिव और चुनाव अधिकारियों की शिकायत की थी। नौ फरवरी को अनुशासन समिति सचिव ने जिला बार एसोसिएशन के अध्यक्ष विश्राम सिंह यादव, महासचिव संजीव पारिया, चुनाव समिति के सदस्य डॉ. अनुपम दुबे, शिव प्रताप सिंह उर्फ चीनू और दीपक द्विवेदी को दस साल के लिए डिबार किए जाने का आदेश जारी किया था।
इसमें कहा था कि डिबार हुए वकील किसी भी न्यायालय, सक्षम न्यायालय, प्राधिकरण, न्यायाधिकरण के समक्ष अधिवक्ता के रूप में उपस्थित होने के लिए प्रतिबंधित रहेंगे। इस आदेश के खिलाफ महासचिव संजीव पारिया, दीपक द्विवेदी, शिव प्रताप सिंह ने बार कौंसिल अध्यक्ष को प्रत्यावेदन देकर एक पक्षीय हुए आदेश पर रोक लगाने की मांग की। अध्यक्ष ने नौ फरवरी को डिबार किए जाने के आदेश पर रोक लगा दी है।
इस संबंध में सचिव रामचंद्र मिश्रा ने आदेश जारी कर दिया है। उन्होंने 30 मार्च को सुनवाई के लिए राजीव बाजपेई, शिव प्रताप सिंह उर्फ चीनू, डॉ. अनुपम दुबे, दीपक द्विवेदी, बार एसोसिएशन के अध्यक्ष विश्राम सिंह यादव और महासचिव संजीव पारिया को बार कौंसिल तलब किया है। अधिवक्ता राजीव बाजपेई ने बताया कि बार कौंसिल उत्तर प्रदेश के अध्यक्ष ने नियम विरुद्ध आदेश जारी किया है। मेरिट के आधार पर दिए गए आदेश को रिकाल नहीं किया जा सकता है। इस आदेश के खिलाफ वह बार कौंसिल आफ इंडिया के अध्यक्ष के पास जाएंगे।