फर्रुखाबाद। जिला बार एसोसिएशन के अध्यक्ष विश्राम सिंह यादव, महासचिव संजीव पारिया समेत पांच वकीलों को बार कौंसिल उत्तर प्रदेश की विशेष समिति के सचिव ने दस साल के लिए डिबार कर दिया है। यह कार्रवाई बार एसोसिएशन के चुनाव में माडल बायलॉज का पालन न करने और अनुशासन समिति के आदेशों के उल्लंघन पर हुई शिकायत पर की गई है। इसका आदेश जिलाधिकारी और डीएम को भी दिया जाएगा।
बार एसोसिएशन की चुनाव समिति के सदस्य शिव प्रताप सिंह, अनुपम दुबे, दीपक द्विवेदी, जिला बार एसोसिएशन के नवनिर्वाचित अध्यक्ष विश्राम सिंह यादव, महासचिव संजीव पारिया, पूर्व अध्यक्ष विपनेश सक्सेना के खिलाफ बार कौंसिल उत्तर प्रदेश की अनुशासन समिति के पास अधिवक्ता राजीव बाजपेई ने मामला दर्ज कराया था। इसमें कहा गया कि बार एसोसिएशन के पदों पर चुनाव मॉडल बायलॉज से नहीं कराया गया। इसकी शिकायत करने पर अनुशासन समिति ने जो आदेश चुनाव समिति और अध्यक्ष व महासचिव को दिए, उनका भी पालन नहीं किया गया।
19 सितंबर को चुनाव कराकर नवनिर्वाचित पदाधिकारियों की घोषणा कर दी गई। 22 सितंबर को वकील राजीव कुमार बाजपेई ने दोबारा अनुशासन समिति को प्रार्थना पत्र देकर कहा कि बार एसोसिएशन के चुनाव अवैध तरीके से कराए गए हैं। इनको रद्द कर अध्यक्ष, महासचिव व चुनाव समिति के खिलाफ विधिक कार्रवाई किए जाने की मांग की थी। बार कौंसिल उत्तर प्रदेश की अनुशासन समिति ने शिकायत पर सुनवाई के बाद जिला बार एसोसिएशन के अध्यक्ष विश्राम सिंह यादव, महासचिव संजीव पारिया, चुनाव समिति के सदस्य डॉ. अनुपम दुबे, दीपक द्विवेदी, शिव प्रताप सिंह उर्फ चीनू को व्यावसायिक कदाचार का दोषी मानते हुए किसी भी न्यायालय, सक्षम न्यायालय, प्राधिकरण, न्यायाधिकरण के समक्ष अधिवक्ता के रूप में दस साल तक उपस्थित होने पर प्रतिबंधित कर दिया है।
इन सभी को दस साल के लिए डिबार घोषित किया है। पूर्व अध्यक्ष विपनेश सक्सेना न तो चुनाव लड़े और न ही वह चुनाव अधिकारी थे। इस कारण उनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई। उनको जारी नोटिस भी निरस्त कर दिया गया है।
वरिष्ठ अधिवक्ता राजकुमार सिंह राठौर, जवाहर सिंह गंगवार, राजीव बाजपेई, धर्मवीर गौतम, कुंवर सिंह यादव ने कचहरी परिसर में अपने चैंबर में वार्ता में बताया कि अनुशासन समिति के आदेश का पालन किए जाने के लिए जिला जज और डीएम के पास आदेश की कापी भेजी गई है।
वर्जन
वहीं, अध्यक्ष विश्राम सिंह यादव ने बताया कि वह निर्दोष हैं। पूर्व अध्यक्ष ने चुनाव कमेटी बनाई थी। वह तो चुनाव लड़े और जीते थे। यदि चुनाव गलत हुआ था तो चुनाव निरस्त होना चाहिए था, पर ऐसा नहीं हुआ। डिबार किया जाना न्याय संगत नहीं है।
महासचिव संजीव पारिया ने बताया कि बार कौंसिल उत्तर प्रदेश की विशेष समिति का निर्णय नितांत अनुचित, गैर कानूनी और न्याय सिद्धांत के विपरीत है। चुनाव उच्च न्यायालय के आदेश पर दायर याचिका के अनुसार कराया गया था। वर्तमान में भी बार कौंसिल के मनमाने निर्णय के विरुद्ध रिट उच्च न्यायालय में विचाराधीन है। ऐसे में बार कौंसिल द्वारा तानाशाहीपूर्ण रवैया अपनाते हुए यह आदेश जारी किया गया है। इस आदेश के खिलाफ बार कौंसिल इंडिया में अपील और उच्च न्यायालय में अवमानना की याचिका दाखिल की जाएगी।
चुनाव समिति के सदस्य डा. अनुपम दुबे ने बताया कि यह निर्णय राजनैतिक दबाव में किया गया है। यदि चुनाव गलत हुआ तो उसको रद्द करना चाहिए था, डिबार करना गलत है। इस आदेश के खिलाफ अपील की जाएगी।
दीपक द्विवेदी ने बताया कि यह आदेश एकतरफा हुआ है। इस तरह का आदेश अनुचित है। शिव प्रताप सिंह ने बताया कि चुनाव सही कराया गया था, इससे उसको रद्द नहीं किया गया। जो डिबार की कार्रवाई की गई है वह नियम विरुद्ध हुई है।