अमृतपुर (फर्रुखाबाद)। विकासखंड राजेपुर क्षेत्र के गंगा किनारे बसा गांव कुड़री सारंगपुर के मतदाता 2 से 3 किलोमीटर दूर वोट डालने जाते हैं। गांव में बूथ बनवाने के लिए जिलाधिकारी से कई बार मांग कर चुके हैं। गांव आने जाने के लिए कोई मार्ग नहीं है। गंगा के कटान से गांव को रोकने के लिए किसी नेता ने ध्यान नहीं दिया है।
विकासखंड राजेपुर क्षेत्र के गांव कुड़री सारंगपुर की आबादी लगभग 1200 है। इस गांव में लगभग 700 मतदाता हैं। ग्रामीणों का कहना है कि उन लोगों को दो किलोमीटर दूर गांव फखरपुर व गांव हमीरपुर परतापुर के बूथों पर वोट डालने पैदल जाना पड़ता है। इससे शारीरिक रूप से कमजोर व महिलाएं अक्सर मतदान करने ही नहीं जातीं। जबकि गांव में स्थित प्राथमिक विद्यालय में बूथ बनाया जा सकता है।
ग्राम प्रधान बबलू कश्यप ने बताया है कि बूथ बनवाने के लिए जिलाधिकारी को कई बार प्रार्थना पत्र देकर मांग कर चुके हैं, लेकिन सुनवाई नहीं हुई। गांव में बूथ बनने से मतदान का प्रतिशत बढ़ जाएगा। गांव के बुजुर्ग व महिलाएं साधन न होने से वोट डालने नहीं जा पाते हैं। गंगा किनारे बसा होने से गांव बाढ़ में कई बार कट चुका है।
जिलाधिकारी, सांसद व विधायक से गांव कटान से बचाने को वह लोग ठोकरें बनवाने के लिए कई बार मांग कर चुके हैं। किसी ने इस ओर ध्यान नहीं दिया। गांव के पूरनलाल, राम रहीम, हेतराम, राजपाल, शीशराम, छविनाथ, गंगाराम, अतर सिंह, कुंवर सिंह आदि ग्रामीणों का कहना है कि वोट हर बार देते हैं, लेकिन विधायक व सांसद गांव के हालात देखने कभी नहीं आते। गांव के लिए कोई पक्का संपर्क मार्ग नहीं है। बरसात के समय गांव का आवागमन बंद हो जाता है। जगह जगह पानी भर जाने से पैदल निकलना भी मुश्किल हो जाता है।