फर्रुखाबाद। लोकसभा चुनाव में गठबंधन की सीट बसपा के खाते में जाना लगभग तय माना जा रहा है। राजनीतिक सूत्रों की मानें तो बसपा और सपा मुखिया की बातचीत के बाद फर्रुखाबाद की सीट का फैसला लिया गया है। दो लोगों ने बसपा से चुनाव लड़ने के लिए आवेदन भी कर दिया है।
सपा और बसपा के गठबंधन के बाद फर्रुखाबाद की लोकसभा सीट पर सभी की निगाहें हैं। गठबंधन के बाद फर्रुखाबाद लोकसभा सीट सपा के खाते में मानी जा रही थी। इसको लेकर सपा से टिकट पाने के लिए कई दिग्गज नेताओं ने जोड़तोड़ शुरू कर दी। पर, सपा में विधानसभा चुनाव 2017 से चल रही गुटबाजी अंदर ही अंदर अभी भी कायम है। इसी वजह से सपा मुखिया अखिलेश यादव फर्रुखाबाद की सीट को लेकर काफी गंभीर थे।
सूत्रों की मानें तो 15 जनवरी को बसपा सुप्रीमो मायावती के जन्मदिन पर सीटों के बंटवारे का एलान किया जाना था, लेकिन किसी वजह से एलान नहीं हो सका। पर, बसपा सुप्रीमो मायावती और सपा राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव के बीच सीटों के बंटवारे को लेकर चर्चा हो चुकी है। इसमें फर्रुखाबाद की सीट बसपा के खाते में जाना तय माना जा रहा है। ऐसा इसलिए कि इटावा लोकसभा की सीट सुरक्षित है और इटावा सपा का गढ़ माना जाता है।
फर्रुखाबाद सीट यदि सपा को मिलती है तो यहां अंदरूनी विरोध हो सकता है। इस विरोध को खत्म करने और गठबंधन में फर्रुखाबाद लोकसभा सीट हर हाल में जीतने के लिए यह सीट बसपा की झोली में डाली गई है।
गौरतलब है कि 2014 में हुए लोकसभा चुनाव में जिले में सपा दूसरे, बसपा तीसरे और 2009 के चुनाव में बसपा दूसरे और सपा तीसरे स्थान पर आई थी।