अयोध्या। दीपोत्सव के दौरान विहिप की रामलला के दरबार में करीब 51 हजार दीपक जलाने की मंशा पर पानी फिर गया। विवादित परिसर के रिसीवर मंडलायुक्त ने विहिप को इसकी अनुमति नहीं दी। मंडलायुक्त मनोज मिश्र ने कहा कि वहां पर व्यवस्थाएं पारंपरिक रूप से सुप्रीम कोर्ट के आदेशानुसार चल रही हैं, उसके अलावा यदि कोई पक्षकार कुछ करना चाहता है तो उसे अनुमति के लिए सुप्रीम कोर्ट में प्रार्थना करनी चाहिए।
रामलला के दरबार में करीब 51 हजार दीपक जलाने की मांग को लेकर सोमवार को विहिप ने साधु-संतों के साथ विवादित परिसर के रिसीवर/मंडलायुक्त मनोज मिश्र से मुलाकात कर ज्ञापन सौंपा। विहिप के प्रांतीय मीडिया प्रभारी शरद शर्मा ने बताया कि हमने विवादित परिसर के रिसीवर से मुलाकात कर उनसे अनुमति मांगी है।
कहा कि दीपोत्सव धूमधाम से मनाया जाए इसको लेकर शासन-प्रशासन के द्वारा लगातार तीन साल से यह उत्सव मनाया जा रहा है, इस उत्सव का आयोजन रामलला के दरबार में भी होना चाहिए। राम के जन्मस्थान पर भी दीपोत्सव की छटा बिखरनी चाहिए। संतों ने मंडलायुक्त से निवेदन किया है कि उनकी भावनाओं का सम्मान होना चाहिए। बताया कि फिलहाल कोई अनुमति रिसीवर से नहीं मिली है।
हमारी यह भी मांग है कि हमें अनुमति नहीं दी जाती है तो प्रशासन स्वयं ही रामलला के दरबार में हजारों दीप जलाने की व्यवस्था सुनिश्चित करे। मंडलायुक्त मनोज मिश्र ने कहा कि वहां पर जो भी व्यवस्थाएं पारंपरिक रूप से सुप्रीम कोर्ट के आदेशानुसार चल रही हैं उसके अलावा यदि कोई पक्षकार कुछ करना चाहता है तो उसे अनुमति के लिए सुप्रीम कोर्ट में प्रार्थना करनी चाहिए।