अयोध्या। डॉ रामनोहर लोहिया अवध विश्वविद्यालय प्रशासन पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोपों की जांच के लिए रविवार को कुलपति प्रो. मनोज दीक्षित स्वयं आगे आए।
उन्होंने डीएम को पत्र लिखकर विवि कर्मचारी परिषद की ओर से लगाए गए सभी 23 बिंदुओं की सीबीआई जांच की सिफारिश की है। कहा कि यदि कर्मचारी परिषद अपनी जांच की मांग से मुकरे तो पदाधिकारियों के विरुद्ध कड़ी अनुशासनात्मक व विधिक कार्रवाई भी अवश्य हो। मामले में जिला प्रशासन सभी तथ्यों से शासन को अवगत कराने की बात कह रहा है।
अवध विवि में इन दिनों कर्मचारी परिषद व कुलपति के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर चरम पर है। कुलपति पर निर्माण कार्य, चहेतों-रिश्तेदारों की नियम विरुद्ध नियुक्ति करने, नियमों को दरकिनार कर मनमाने ढंग से करोड़ों के टेंडर देने, बनने के साथ भवनों-गेटों के ढहने, डिजिटाइजेशन के नाम पर छह करोड़ की अनियमितता, एप व खरीद में करोड़ों की बंदरबांट समेत कई प्रशासकीय कामकाज में भी वित्तीय अनियमितता के आरोप मुख्यमंत्री तक भेजे गए हैं।
कार्रवाई के लिए विवि के कर्मचारी 5 दिसंबर से बेमियादी कार्य बहिष्कार पर हैं। जिस दिन आंदोलन शुरू हुआ और आरोपों की फेहरिस्त सार्वजनिक हुई, सबसे पहले कुलपति प्रो. मनोज दीक्षित ने कुलसचिव का अधिकार सीज करने की कार्रवाई की। अब सहायक कुलसचिव उनका काम देख रहे हैं।
मामले में नया मोड़ रविवार को सामने आया। आरोपों से आहत कुलपति प्रो. दीक्षित ने खुद डीएम को पत्र लिखकर कर्मचारी परिषद की ओर उन पर लगाए गए 23 आरोपों की जांच सीबीआई से कराने को अनुरोध किया।
कुलपति ने लिखा है कि मुख्यमंत्री को संबोधित पत्र में विवि कर्मचारी संघ के अध्यक्ष राजेश कुमार पांडेय व महामंत्री श्याम सुमन के संयुक्त हस्ताक्षर से उनके कार्यकाल में हुई अनियमितताओं के 23 बिंदुओं का उल्लेख किया गया है। मामले की सीबीआई जांच कराने की मांग की गई है। इसका वे स्वागत करते हैं।