परिक्षेत्र की तीन चीनी मिलों में से मसौधा चीनी मिल को छोड़ बाकी दोनों मिलों के सैकड़ों किसानों का आज भी बकाया को लेकर रोना है। दोनों चीनी मिले किसानों का 8.33 करोड़ दबाए बैठी हैं। हाईकोर्ट के सख्त आदेश के बावजूद किसानों का शत-प्रतिशत गन्ने के मूल्य का बकाया भुगतान नहीं हो पाया है। अधिकारी चीनी मिलों को पत्र और नोटिसें भेज इतिश्री कर रहे हैं, मिलें किसी की सुन नहीं रही हैं। ऐसे में नए पेराई सत्र शुरू होने के बाद किसानों में अब निराश घर कर गई है। यही कारण है इस बार गन्ना रकबा में काफी गिरावट दर्ज की गई है।
परिक्षेत्र में बीते वर्ष जहां 58 हजार हेक्टेअर भूमि पर गन्ने की खेती की गई थी, वहीं अगस्त 2015 में 55 हजार तीन सौ हेक्टेयर गन्ने का रकबा आंका गया है। अधिकारी भी किसानों के बकाया भुगातन दिलाने के बजाए ढांढस बंधा रहे हैं। हालांकि चीनी मिल मसौधा ने किसानों के शत-प्रतिशत गन्ना मूल्य का भुगतान किया और नए पेराई सत्र में सबसे पहले चीनी मिल भी शुरू कर दी है। चीनी मिल मसौधा के शुरू करने और किसानों के शत-प्रतिशत भुगतान के पीछे जिलाधिकारी अनिल ढींगरा का दबाव माना जा रहा है लेकिन उनका दबाव जिले की चीनी मिल रौजागांव पर अभी कारगर नहीं दिखता।
हां इतना असर जरूर हुआ कि अगस्त में जहां किसानों का यहां बकाया 46.18 करोड़ था, वह अब घटकर तीन करोड़ रुपये रह गया है। मिल 95 प्रतिशत से अधिक गन्ना मूल्य का भुगतान कर चुकी है। सबसे अधिक गन्ना मूल्य बकाया परिक्षेत्र में चीनी मिल मिझौड़ा के पास है। अंबेडकरनगर जिले में स्थापित इस चीनी मिल के पास किसानों का लगभग 5 करोड़ 33 लाख रुपये बकाया है।