सावन मास शुरू होने के साथ ही शिवभक्तों की भीड़ शिव मंदिरों में उमड़ रही है। मास के पहले सोमवार को लेकर प्रमुख शिवालय सरयू तट स्थित प्रसिद्ध नागेश्वरनाथ, क्षीरेश्वरनाथ, गुप्तारघाट के पंचमुखी महादेव मंदिर में भक्तों की उमड़ने वाली भीड़ को लेकर तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। पुलिस व प्रशासन ने सुरक्षा के कड़े बंदोबस्त किए हैं।
वैष्णवों की नगरी अयोध्या में भगवान शिव भक्ति की गूंज होती है। सरयू तट स्थित नागेश्वरनाथ और श्रीराम जन्मभूमि संपर्क मार्ग के पास स्थित क्षीरेश्वरनाथ मंदिर शिव भक्तों की आस्था का केंद्र हैं। नागेश्वरनाथ मंदिर के व्यवस्थापक पं. सभापति तिवारी बताते हैं कि अत्यंत प्राचीन ऐतिहासिक मंदिर की स्थापना भगवान राम के कनिष्ठ पुत्र कुश जी ने की थी।
त्रेता युग से आज तक कई बार मंदिर बना और बिगड़ा पर विग्रह वही है। अंतिम बार विक्रमादित्य जी के द्वारा इस मंदिर का निर्माण किया गया, जिनकी 32 पुतलियां अभी प्रांगण में स्थित हैं। देश के 108 ज्योर्तिलिंगों में इसकी गणना होती है।
कहते हैं कि सावन मास में शिवभक्तों की उमड़ने वाली भारी भीड़ के मद्देनजर साफ-सफाई के साथ ही प्रकाश आदि की व्यवस्था दुरुस्त कर दी गई है। क्षीरेश्वरनाथ मंदिर के पुजारी पंडित रामाज्ञा मिश्र बताते हैं कि क्षीरेश्वरनाथ मंदिर में शिवलिंग की स्थापना इक्ष्वाकुवंश कोसल के राजा दशरथ द्वारा पुत्र प्राप्ति के लिए की गई थी।
भगवान राम, लक्ष्मण, भरत व शत्रुघ्न रूप में पुत्र प्राप्ति के लिए राजा दशरथ ने गोदुग्ध से अतिरुद्राभिषेक किया, जो शिवलिंग या अर्घ्य से नीचे दुग्ध गिरा वह इतना प्रचुर मात्रा में था कि दुग्ध का सागर ही स्थापित हो गया।
इसी कारण संपूर्ण भू-भाग का नाम ‘क्षीरेश्वरनाथ’ पड़ गया। मंदिर में शिवभक्तों के अभिषेक व पूजन के लिए साफ-सफाई के साथ प्रकाश आदि की व्यवस्था चाक-चौबंद कराई गई है। उधर, फैजाबाद के गुप्तारघाट पर पंचमुखी महादेव, देवकाली, झारखंडी महादेव आदि शिवालयों में भक्तों की भीड़ रहेगी।