वह दिन दूर नहीं, जब आपका सांस ले पाना भी दूभर हो सकता है। ऐसा इसलिए होगा, क्योंकि कचरा छोड़ने के मामले में फैजाबाद पहले पायदान पर है। फैजाबाद शहर का ध्वनि और वायु प्रदूषण अभी घातक तो नहीं हुआ है, लेकिन खतरे की ओर तेजी तेजी से बढ़ रहा है। अगर अस्पताल के कचरे की ही बात करें तो इस जिले में रोजाना पांच क्विंटल कचरा निकल रहा है।
सूत्रों के अनुसार उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड परिक्षेत्र में फैजाबाद के अलावा अंबेडकरनगर, गोंडा, बलरामपुर, बहराइच और श्रावस्ती शामिल हैं। फैजाबाद में 105, अंबेडकरनगर में 32, गोंडा में 48, बलरामपुर में 25, बहराइच में 43 व श्रावस्ती में सिर्फ 08 अस्पताल, नर्सिंग होम व पैथालॉजी चिह्नित हुए हैं, जहां से प्रतिदिन कई क्विंटल अस्पताल का कचरा निकल रहा है। फैजाबाद में अस्पताली कचरे से प्रदूषण का भार सबसे ज्यादा 495.25 किलोग्राम प्रतिदिन है।
कचरे का यह भार गोंडा 282.25 किग्रा. बहराइच 157.25 किग्रा., अंबेडकरनगर 148.75, बलरामपुर 155.25 और श्रावस्ती में सबसे कम भार 87.5 किग्रा प्रतिदिन हैं। इनमें से बोर्ड को अनेक अस्पताल ऐसे मिले हैं, जो हानिकारक प्रदूषण वायुमंडल में छोड़ रहे हैं। इन कचरों को शोधित करने का इनके पास अपना निजी या सामूहिक उपाय नहीं है।
मऊ शिवाला का कचरा निस्तारण संयंत्र बंद
फैजाबाद के मऊशिवाला में एक संयंत्र इसके लिए जरूर लगा था, लेकिन स्थानीय ग्रामीणों की शिकायत पर बोर्ड ने इसे बंद करवा दिया। इस संयंत्र के चालू रहने पर कुछ को छोड़ बाकी अपना कचरा वहां न ले जाकर खुले में डाल दे रहे थे। अब इन अस्पतालों के कचरों का निस्तारण स्पेक्ट्रा वेस्ट सोल्यूशन लखनऊ द्वारा किए जाने का दावा किया जा रहा है।
प्रति व्यक्ति प्रतिदिन निकलता ढाई सौ ग्राम कचरा
फैजाबाद में तो मानव उत्सर्जित कचरा भी कम नहीं है। पालिका सूत्र के अनुसार एक व्यक्ति प्रतिदिन ढाई सौ ग्राम कचरा निकलता है। यह घुलनशील और अघुलनशील दोनों प्रकार का है। नगर क्षेत्र की आबादी के हिसाब से नगर से पांच टन कचरा प्रतिदिन निकल रहा है। पालिका के पास कचरे को शोधित करने या फिर खाद बनाने का संयंत्र नहीं है। ऐसे में वह कचरा जहां-तहां खुले में फेंक रही है। ऐसे में अस्पताली और मानवजनित कचरा आगामी दिनों में खतरनाक रूप ग्रहण कर ले तो कोई ताज्जुब नहीं।
परिक्षेत्र में ढाई सौ से अधिक अस्पताल हैं। इनके कचरे का निस्तारण प्रापर वे में हो रहा है। मऊ शिवाला में लगे संयंत्र को बंद करा दिया गया है। निकलते कचरे को निस्तारण के लिए लखनऊ भेजा जाता है। ध्वनि प्रदूषण मानक से कुछ अधिक जरूर है। इसका स्तर 55 से 60 डेसिबल होना चाहिए, लेकिन दिन में 62-63 डेसिबल पहुंच रहा है। रात 10 बजे से सुबह छह बजे तक ध्वनि प्रदूषण का स्तर सामान्य (45-50) है। -राम गोपाल, क्षेत्रीय अधिकारी, उप्र. प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड।