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राममंदिर की होर्डिंग से गर्म हुआ सियासी माहौल

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चर्चा का विषय बनी भाजपा की होर्डिंग - फोटो : FAIZABAD
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अयोध्या। विधानसभा चुनाव से पूर्व अयोध्या में कई स्थानों पर लगी राम मंदिर की होर्डिंग ने सियासी माहौल गर्म कर दिया है। भारतीय जनता पार्टी की इस होर्डिंग का टाइटल है, फर्क साफ है... तब रामलला थे टेंट में, अब हो रहा भव्य राम मंदिर का निर्माण।
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इसमें एक तरफ टेंट में विराजमान रामलला की और दूसरी ओर निर्माणाधीन मंदिर के भव्य मॉडल की तस्वीर है। यह होर्डिंग जहां सुर्खियों में है वहीं रामनगरी में सर्दी के इस मौसम में भी सियासी माहौल को भी गर्म कर दिया है।
विपक्षी दलों ने इस होर्डिंग को लेकर भाजपा पर सवाल खड़े किए हैं। भाजपा की ओर से अयोध्याधाम के रामजन्मभूमि के गेट नंबर-3 के समीप ही बाबरी मस्जिद के पक्षकार रहे इकबाल अंसारी के घर के पास यह होर्डिंग लगाई गई है।
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इसी तरह की होर्डिंग शहर के अन्य कई स्थानों पर भी लगी हुई है। होर्डिंग्स में सबसे ऊपर लिखा है फर्क साफ है...और सबसे नीचे भाजपा का चुनाव चिह्न कमल का फूल बना है।
होर्डिंग के ऊपरी हिस्से में जहां तब व अब की उपलब्धि बताने की कोशिश की गई है। तब के नीचे टेंट में विराजमान रामलला व अब के नीचे निर्माणाधीन राम मंदिर का मॉडल है।
इसी तरह होर्डिंग के निचले हिस्से में सोच ईमानदार, काम दमदार और एक बार भाजपा सरकार लिखा हुआ है। इस होर्डिंग को लेकर फिलहाल सियासी सरगर्मी बढ़ गई है। भाजपा नेताओं का कहना है कि इस होर्डिंग में कुछ भी गलत नहीं है।
वहीं सपा व कांग्रेस ने इसको लेकर सवाल खड़ा किया है। भाजपा नेता इस होर्डिंग में अयोध्या में बन रहे श्रीराम मंदिर के मॉडल को सरकार की उपलब्धि बता रहे हैं तो वहीं विपक्षी दलों का आरोप है कि भाजपा भगवान राम के नाम पर एक बार फिर से राजनीति करने में जुट गई है। मंदिर-मस्जिद के नाम पर लोगों को बांटने में जुटी है।
भाजपा की जमीन खिसक गई है। उनके पास चुनाव लड़ने के लिए कोई मुद्दा ही नहीं है, क्योंकि विकास उनके कार्यकाल में हुआ नहीं है। महंगाई से जनता परेशान है। किसान, नौजवान से लेकर हर वर्ग इस सरकार से त्रस्त है। ऐसे में अब पोस्टर वार के जरिए लोगों को बरगलाने की नई कोशिश शुरू की गई है। भाजपा विकास कार्यों की होर्डिंग न लगवाकर राम के नाम का सहारा ले रही है। - पवन पांडेय, सपा
भाजपा सरकार हर मोर्चे पर विफल हुई है। इसी वजह से राम के नाम पर राजनीति करने के अलावा उनके पास कुछ बचा नहीं है। राममंदिर का फैसला सुप्रीम कोर्ट से आया है। भाजपा को हार का डर सता रहा है इसलिए राजनीतिक लाभ लेने के लिए वे श्रीराम का सहारा ले रहे हैं, लोगों का दिग्भ्रमित करने का प्रयास है। चुनाव आयोग को इसका संज्ञान लेना चाहिए। - शरद शुक्ला, कांग्रेस
विपक्ष के पास कोई मुद्दा नहीं बचा है। वह अनर्गल प्रलाप कर रहा है। इन्हें अयोध्या का विकास नजर नहीं आ रहा है। सुप्रीम कोर्ट का जब फैसला आया तब भी हमारी सरकार थी। भव्य मंदिर भी हमारी सरकार के ही कार्यकाल में बन रहा है। क्या सपा के सरकार में रामलला टेंट में नहीं थे। इसलिए तब और अब में बहुत बड़ा अंतर तो है ही। तब अयोध्या उपेक्षित थी, आज मंदिर निर्माण के साथ अयोध्या विकास की नई इबारत लिख रही है। -वेदप्रकाश गुप्ता, नगर विधायक
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