इस बार अनुमोदित शिक्षकों की संख्या के बजाय विश्वविद्यालय ने विषयों की संबद्धता के आधार पर सीटें निर्धारित की हैं। इससे छोटे व बड़े कॉलेजों में सीटें लगभग समान हो गईं।
विश्वविद्यालय ने नए शैक्षिक सत्र के लिए संबद्ध 11 जिलों के कॉलेजों की सीटें शुक्रवार शाम निर्धारित कर दीं। सीट निर्धारण के लिए कुलपति प्रो. जीसीआर जायसवाल की ओर से पिछले दिनों गठित सीट मैट्रिक्स समिति के निर्णय को कुलसचिव एएम अंसारी ने शुक्रवार देरशाम वेबसाइट पर अपलोड करा दिया है।
समिति के फैसले में पूर्व से संचालित महाविद्यालयों में बीए व बीएससी में प्रति विषय की दर से 60 सीटें तथा बीकॉम, बीएससी कृषि व बीपीई पाठ्यक्रम में प्रत्येक कॉलेज को 300-300 सीटें आवंटित की गई हैं।
जबकि एमए, एमएससी व एमकॉम में पूर्व से निर्धारित सीटों के अनुसार एक सेक्शन को मान्य किया गया है। पत्र में कहा गया है कि अगले शैक्षिक सत्र में विश्वविद्यालय, विषय पुंज निर्धारित करेगा।
उसी के अनुसार कॉलेजों में प्रवेश लिए जाएंगे। समिति ने पहले से संचालित और संबद्धता प्राप्त कॉलेजों में प्रवक्ताओं का अनुमोदन न होने पर सीटें नहीं निर्धारित की है।
वहीं पूर्व संचालित ऐसे कॉलेज, जिनमें प्रवक्ताओं का अनुमोदन होने के बावजूद वेतन का भुगतान बैंक के जरिए नहीं हो रहा। उनकी भी सीटें नहीं निर्धारित की हैं।
इसके अलावा ऐसे संबद्धता प्राप्त महाविद्यालय, जिनमें प्रवक्ताओं के अनुमोदन संबंधी सारी कार्यवाही हो गई, लेकिन फाइल विश्वविद्यालय में निस्तारण के लिए जमा है, उनमें न्यूनतम सीटें निर्धारित करने की बात कही है।
दूसरी ओर जिन महाविद्यालयों में विषयों या पाठ्यक्रमों की संबद्धता 30 जून को समाप्त हो गई है और नए सत्र के लिए अभी संबद्धता नहीं मिली, उनमें लिए गए प्रवेश को अमान्य कर दिया गया है।
इसके साथ पिछले साल एक जुलाई या पूर्व से संचालित महाविद्यालयों में प्रवक्ताओं का अनुमोदन न होने की स्थिति में सीटें नहीं निर्धारित होने के बाद भी लिए गए एडमिशन को अमान्य कर दिया गया है।