अयोध्या। श्रीरामजन्मभूमि परिसर में राममंदिर निर्माण कार्य तेजी से चल रहा है। अब रामलला के गर्भगृह का भी निर्माण शुरू हो गया है। अष्टकोणीय राममंदिर का निर्माण विष्णु मंदिर की शैली में हो रहा है। राममंदिर के तीनों तलों को मिलाकर कुल 12 प्रवेश द्वार होंगे। सिंहद्वार से प्रवेश करते ही भक्तों को रामलला की दिव्य छवि का दर्शन मिलने लगेगा। गर्भगृह की भव्यता भक्तों को आकर्षित करेगी।
राममंदिर का गर्भगृह अष्टकोणीय होगा लेकिन देखने में चौकोर लगेगा। 20 गुणे 20 फीट के गर्भगृह में 20 फीट चौड़ा परिक्रमा मार्ग भी होगा। भक्त गर्भगृह में विराजमान रामलला सहित चारों भाइयों की परिक्रमा कर सकेंगे। गर्भगृह में किसी को भी प्रवेश की अनुमति नहीं होगी। गर्भगृह से तीसरे तल तक कुल 12 प्रवेश द्वार होंगे। गर्भगृह को आकार देने का काम प्रारंभ हो चुका है। पहली जून को सीएम योगी आदित्यनाथ ने गर्भगृह निर्माण का शुभारंभ कर दिया है।
अभी प्रतिदिन 25 से 30 पत्थरों को जोड़ने का काम किया जा रहा है। शीघ्र ही इसकी गति बढ़ाने की तैयारी है। ट्रस्ट की योजना है कि प्रतिदिन करीब 150 पत्थरों का इंस्टालेशन किया जाए ताकि निर्धारित डेडलाइन तक गर्भगृह का निर्माण कार्य पूरा हो सके। वहीं गर्भगृह के लिए एक लाख क्यूबिक पत्थर तैयार हैं, शेष पत्थरों की नक्काशी व तराशी अयोध्या सहित राजस्थान की तीन कार्यशालाओं में की जा रही है।
ट्रस्ट के सूत्रों ने बताया कि मंदिर के गर्भगृह के खंभों पर नक्काशी में विशेष ध्यान दिया जा रहा है। सभी कॉलम विशेष तरीके के रूफ वाले हैं। नीचे चार, फिर छह, आठ इस तरीके से प्रतिमाएं उकेरी गई हैं। प्रतिमाओं को आकार देने का काम पत्थरों के इंस्टालेशन के बाद होगा क्योंकि इंस्टालेशन के समय प्रतिमाओं के टूटने का भी खतरा रहता है। गर्भगृह के पत्थरों में देवी-देवताओं सहित रामकथा आधारित कुल 6400 प्रतिमाएं उकेरी जानी हैं।
राममंदिर निर्माण का काम जोरों पर चल रहा है। गर्भगृह के निर्माण का काम प्रारंभ हो गया है। जितने पत्थर तैयार हैं, उन्हें जोड़ने का काम शुरू हो चुका है। पत्थरों को आपस में जोड़ने के लिए सीमेंट के विशेष घोल का प्रयोग किया जा रहा है। वंशीपहाड़पुर से पत्थरों की आपूर्ति लगातार हो रही है।
-डॉ. अनिल मिश्र, सदस्य, श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट