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गर्भगृह के लिए नए सिरे से शुरू हुई पत्थरों की तराशी

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अयोध्या-राम मंदिर मॉडल - फोटो : FAIZABAD
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अयोध्या। राममंदिर के गर्भगृह के लिए अब नए सिरे से पत्थरों की तराशी का कार्य किया जा रहा है। इससे पूर्व गर्भगृह के लिए तराशे गए करीब 40 हजार घनफुट पत्थरों का प्रयोग अब दूसरी मंजिल के लिए किया जाएगा।
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सुप्रीम कोर्ट से राममंदिर के हक में फैसला आने के बाद संतों की मांग पर ट्रस्ट ने राममंदिर के मॉडल में भी परिवर्तन किया था। इसके तहत राममंदिर 161 फीट ऊंचा होगा, इसमें तीन तल होंगे।
राममंदिर के मॉडल में परिवर्तन के बाद अब गर्भगृृह के लिए नए सिरे से पत्थरों की तराशी की जा रही है। राममंदिर आंदोलन के दौरान जिस मॉडल पर राममंदिर निर्माण प्रस्तावित था। उसकी ऊंचाई 128 फीट थी, मंदिर दो मंजिला ही था।
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सुप्रीम कोर्ट का निर्णय आने के बाद संतों ने राममंदिर की भव्यता व ऊंचाई बढ़ाने की मांग मुखर की थी। जिसके बाद ट्रस्ट ने मंदिर के मॉडल में परिवर्तन करते हुए मंदिर की ऊंचाई 161 फीट कर दी और मंजिल दो से बढ़ाकर तीन कर दी गई।
पुराने मॉडल के आधार पर विहिप की रामघाट स्थित कार्यशाला में करीब 30 सालों तक पत्थरों की तराशी कराई गई थी। इस तराशी में राममंदिर के गर्भगृह के लिए करीब 75 हजार घनफुट पत्थर व 112 स्तंभों की तराशी व नक्काशी की जा चुकी थी।
लंबे समय से खुले आसमान में होने के कारण करीब 35 हजार घनफुट पत्थर अनुपयोगी हो गए थे। शेष 40 हजार पत्थरों की सफाई कराकर उन्हें सुरक्षित करा दिया गया था।
उधर मंदिर मॉडल में परिवर्तन होने व मंदिर की ऊंचाई बढ़ने के बाद गर्भगृह के स्तंभों की डिजाइन में भी परिवर्तन कर दिया गया है। अब पहली मंजिल में 160 स्तंभ होंगे।
मंदिर भवन के भार को देखते हुए इन स्तंभों की डिजाइन में परिवर्तन किया गया है। नए डिजाइन के पत्थरों की तराशी व नक्काशी राजस्थान में की जा रही है।
राममंदिर की शिखर सहित ऊंचाई कुल 161 फीट होगी। मंदिर में तीन तल होंगे। प्रत्येक तल की ऊंचाई कुल 20 फीट होगी। मंदिर के भूतल में 160 स्तंभों, प्रथम तल में 132 स्तंभ व दूसरे तल में 74 स्तंभ होंगे।
जो पुराने पत्थरों व स्तंभों की तराशी की गई थी वह दो तल के हिसाब से थी। चूंकि मंदिर अब तीन तल का हो गया है इसलिए पुराने स्तंभ मंदिर का भार उठाने में सक्षम नहीं होंगे।
सीबीआरआई रुड़की की अध्ययन रिपोर्ट के मुताबिक गर्भगृह के लिए नए सिरे से पत्थरों की तराशी की जा रही है। इनके स्तंभों की मोटाई करीब तीन इंच बढ़ा दी गई है।
राममंदिर की प्लिंथ की डिजाइन में भी थोड़ा परिवर्तन किया गया है। अब राममंदिर की प्लिंथ में बीच में ग्रेनाइट के पत्थरों को लगाया जाएगा जबकि प्लिंथ के किनारे-किनारे मिर्जापुर के बलुआ पत्थर लगाए जाएंगे।
मंदिर को पानी के रिसाव से बचाने कि लिए कुल 30 हजार घनफुट पत्थर लगेंगे। जिसमें 22 हजार ग्रेनाइट व आठ हजार मिर्जापुर के पत्थर होंगे। बताया कि ग्रेनाइट के आपूर्ति तेजी से हो रही है। अब तक करीब तीन हजार घनफुट ग्रेनाइट पत्थर परिसर पहुंच चुके हैं।
मंदिर के मॉडल में परिवर्तन के बाद मंदिर तीन मंजिला हो गया है। ऐसे में गर्भगृह के लिए पहले तराशे गए स्तंभ मंदिर का भार सहन करने में सक्षम नहीं होंगे। सीबीआरआई रुड़की की रिपोर्ट के बाद स्तंभों की डिजाइन में परिवर्तन कर इनकी मोटाई बढ़ा दी गई है। इसलिए राजस्थान में गर्भगृह के लिए नय सिरे से एक लाख घनफुट पत्थरों की तराशी का काम किया जा रहा है।- डॉ.अनिल मिश्र, ट्रस्टी, श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट
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