धर्मनगरी में ऐतिहासिक क्षीरसागर कुंड का अस्तित्व राजस्व अभिलेखों से अचानक गायब हो गया है। कहा जाता है कि त्रेता युग में राजा दशरथ ने पुत्र रत्न की प्राप्ति के लिए क्षीरेश्वरनाथ का दुग्धाभिषेक किया था, जिससे निकले दूध से क्षीरसागर बना।
लेकिन अब एक आरटीआई के जवाब में राजस्व विभाग ने क्षीरसागर के अस्तित्व को ही खारिज कर दिया है। हालांकि हाईकोर्ट को चार साल पहले अवैध कब्जे के मामले में भेजी गई रिपोर्ट में एडीएम ने क्षीरसागर के अभिलेखीय साक्ष्य दिए हैं।
यही नहीं पौराणिक क्षीरसागर कुंड को चिंहित करने के लिए आजादी के पूर्व एडवर्ड तीर्थ विवेचनी सभा से लगवाया गया शिलालेख आज भी मौजूद है।
रेलवे स्टेशन रोड निवासी भगवती प्रसाद चौरसिया ने बीते 18 मई को जनसूचना अधिकारी तहसील सदर से जन सूचना अधिकार अधिनियम 2005 के तहत तीन बिंदुओं पर सूचना मांगी थी।
इसमें राजस्व भू-अभिलेखों में क्षीरसागर कहां है व उसकी चौहद्दी क्या है, के बाबत 30 जुलाई को तहसील सदर के लेखपाल मुन्ना लाल से हस्ताक्षरित जन सूचना के जवाब में बताया गया है कि ग्राम बरहटा उपरहर परगना हवेली अवध तहसील सदर जिला फैजाबाद के भू-अभिलेख में क्षीरसागर नाम से कोई भूखंड अंकित नहीं है।
इसलिए इसकी चौहद्दी नहीं दी जा सकती है। राजस्व विभाग की यह रिपोर्ट भू-माफियाओं के बड़े रैकेट की ओर संकेत करती है। क्षीरसागर को पहले भी बचाने के लिए कई बार आंदोलन हुए हैं।
मामला हाईकोर्ट तक जा चुका है, जहां से इसे पूर्ववत बहाली के निर्देश दिए गए थे।