अयोध्या। रामजन्मभूमि परिसर में हुए आतंकी हमले की 17 वीं बरसी पर मंगलवार को रामनगरी अलर्ट पर रही। अयोध्या की सीमा पर कड़ी चौकसी करते हुए दिन भर चेकिंग अभियान चलाया गया। सुरक्षा व्यवस्था सख्त रही।
सीमाओं पर विशेष निगरानी की जाती रही। प्रवेश मार्गों पर आने-जाने वालों की पुलिस पहचान पत्र जांच रही थी। पुलिस ने होटल व धर्मशालाओं को भी खंगाला।
रामजन्मभूमि परिसर पर 05 जुलाई 2005 को अत्याधुनिक हथियारों से लैस आतंकियों ने हमला बोल दिया था। सुरक्षाकर्मियों की तत्परता से हमले में शामिल सभी आतंकी मार गिराए गए थे।
हमले के मंगलवार को 17 वर्ष पूरे हो गए। इसको लेकर पुलिस सतर्क रही और पूरी अयोध्या को कड़े सुरक्षा घेरे में जकड़ दिया गया है। हर आने-जाने वाले व्यक्ति पर पुलिस की नजर रही।
सुबह से लेकर देर रात तक सार्वजनिक स्थलों होटल, धर्मशाला, रेलवे स्टेशन, बस स्टेशन को खंगाला जाता रहा। सीओ अयोध्या डॉ.राजेश तिवारी ने बताया कि अयोध्या की सीमा से लेकर सरयू स्नान घाटों की सुरक्षा कड़ी कर दी गई।
प्रमुख मंदिरों के इर्द-गिर्द सादे वर्दी में पुलिस की टीम निगरानी करती रही। खासकर रामजन्मभूमि क्षेत्र में पुलिस टीम अलर्ट पर रही। रामकोट इलाके में मंगलवार को बिना चेकिंग के किसी भी वाहन को प्रवेश नहीं दिया गया।
रामनगरी के आउटर एरिया में भी बैरियर लगाकर पुलिस टीम चेकिंग अभियान चलाती रही। 05 जुलाई 2005 को सुबह करीब सवा नौ बजे रामनगरी गोलियों की तड़तड़ाहट से गूंज उठी थी। अयोध्या के अधिग्रहीत परिसर में असलहों से लैस आतंकी घुस गए थे।
वे लगातार फायरिंग करते हुए उस समय मेक शिफ्ट स्ट्रक्चर (विराजमान रामलला) की ओर बढ़ रहे थे। हालांकि पीएसी व सीआरपीएफ के जवानों की बहादुरी से वे अपनी मंशा में कामयाब नहीं हो सके। सुरक्षा बलों से मुठभेड़ में पांच आतंकी मारे गए।
दो निर्दोष लोगों को भी अपनी जान गवांनी पड़ी। सात लोग गंभीर रूप से घायल हो गए थे। इसके बाद हुई जांच में आतंकियों को असलहों की सप्लाई और मदद करने में जो नाम सामने आए उन सभी को गिरफ्तार कर लिया गया।
आतंकी हमले के 14 साल बाद 18 जून 2019 को प्रयागराज की विशेष अदालत ने फैसला सुनाया। कोर्ट ने चार को आजीवन कारावास की सजा सुनाई, जबकि एक आरोपी मोहम्मद अजीज को बरी कर दिया।