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परमात्मा का 25 वां अवतार है रामचरित मानस

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अयोध्या-कथा का प्रवचन करते कथा व्यास मोरारी बापू - फोटो : FAIZABAD
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अयोध्या। कारसेवकपुरम में संचालित अयोध्या मानस कांड आधारित रामकथा परिक्रमा के दूसरे दिन अभिनव कथाकार संत मोरारी बापू ने रामचरित मानस के अद्भुत रहस्यों को उद्घाटित किया।
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बापू ने कहा कि श्रीरामचरितमानस में मंगलाचरण के कुल 23 श्लोक हैं, बालकांड में सात, अयोध्या कांड में तीन, अरण्य कांड में दो, किष्किन्धा कांड में दो, सुंदरकांड में तीन, लंकाकांड में तीन और उत्तरकांड में तीन, कुल 23 श्लोक मानस में मंगलाचरण के हैं।
मानस के अंत में दो श्लोक हैं, कुल 25 श्लोक हो जाते हैं। यह 25 वां श्लोक स्वयं मानसावतार का प्रतिपादन है। बापू कहते हैं कि परमात्मा का 25 वां अवतार रामचरित मानस है।
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कथाक्रम को आगे बढ़ाते हुए बापू ने कहा कि 25 वां अवतार मानसावतार तो आपकी झोली में ही है अर्थात आपके पास ही है। बस इसे झोली से हृदय तक ले जाना है और यात्रा पूर्ण हुई समझें।
मंगलाचरण का विवेचन करते हुए कहते हैं कि मात्र उच्चारण की शुद्धि से ही सिद्धि नही होगी, आचरण भी मंगल हो तभी सिद्धिदायक होगा। अयोध्याकांड मंगलाचरण के प्रथम श्लोक में शिवजी सहित भगवती पार्वती की वंदना गाते हुए बापू ने बताया कि अभिषेक मात्र अजन्मा का होता है, देहधारी का मात्र स्नान होता है।
अजन्मा मात्र महादेव शिव जी हैं, वही मात्र नीलकंठ हैं। कहा कि साधु वही जो सावधान रहे। जो संसार में रहते हुए भी तपस्वी सा जीवन जिए वो साधु है।
बापू ने जब तापस वेष विशेष उदासी, चौदह बरिस राम वनवासी...के जरिए रामवनगमन प्रसंग छेड़ा तो भक्त भाव विभोर हो उठे। कथा अवसर पर उपस्थित आईजी परिक्षेत्र केपी सिंह, महंत सुरेश दास, अधिकारी राजकुमार दास, जगद्गुरु श्रीरामदिनेशाचार्य, संत सतुआ बाबा, संत मिथिला बिहारी दास सहित बड़ी संख्या में भक्त कथा की भावधारा में डुबकी लगाते दिखे।
मोरारी बापू ने व्यासपीठ से मंदिर निर्माण हेतु अनेकों महापुरुषों के त्याग-समर्पण को प्रणाम करते हुए साकेतवासी महंत रामचंद्र दास परमहंस का स्मरण किया।
जब बापू ने कहा कि राम का मंदिर बनते देखते हैं रोम-रोम खुश हो जाता है तो पूरी कथा पंडाल जय श्रीराम के जयघोष से गूंजने लगा। इस मौके पर बापू ने काशी के सौंदर्य और विकास के लिए प्रधानमंत्री मोदी को भी धन्यवाद ज्ञापित किया ।
मोरारी बापू ने कहा कि अयोध्या कांड युवानि का कांड है। इस कांड के जरिए उन्होंने युवाओं के कई संदेश दिए। कहा कि युवा खूब मौज करो लेकिन विवेक की गंगा सिर पर रखो।
हमारी मौज प्रेरणादायी होना चाहिए। सुखी दांपत्य जीवन का सूत्र बताते हुए कहा कि पति-पत्नी के बीच प्रीत होती है तो पूरे घर का वातावरण बदल जाता है, मर्यादा नहीं टूटनी चाहिए।
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