अयोध्या। रामनगरी में तेजी से बढ़ रहे कोरोना संक्रमण के चलते मठ-मंदिरों के पट बंद कर दिए गए हैं। जिसके चलते भक्तों से गुलजार रहने वाले अयोध्या के मंदिर सूने पड़े हैं।
राममंदिर निर्माण के लिए 5 अगस्त 2020 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा किए गए भूमिपूजन के बाद रामलला के दरबार में भक्तों की संख्या बढ़ी थी।
सामान्य दिनों में रामलला के दर्शनार्थियों की संख्या आठ से 10 हजार हुआ करती थी, लेकिन इस समय रामलला का दरबार भक्तों से सूना है। रोज दर्शन करने वालों की संख्या 10 से भी कम रह गई है।
सुरक्षाकर्मियों के बूटों की आवाज ही रामजन्मभूमि परिसर के सन्नाटे को चीरती नजर आती है। कोरोना संक्रमण के चलते अयोध्या बाहरी भक्तों से वीरान है।
स्थानीय भक्त भी कोरोना के कारण मठ-मंदिरों में जाने के बजाय घरों में ही पूजा-पाठ को प्राथमिकता दे रहे हैं। सरयू स्नान के लिए स्थानीय साधु-संत ब्रह्म मुहूर्त में सरयू घाटों पर जरूर पहुंचते हैं लेकिन इसके बाद पूरे सरयू घाटों पर वीरानी छायी रहती है।
सामान्य दिनों में प्रतिदिन रामलला के दरबार में आठ से 10 हजार भक्त दर्शन-पूजन को पहुंचते थे। चैत्र रामनवमी पर तो दर्शन करने वालों की संख्या लाख तक पहुंच जाती थी, लेकिन इस वर्ष चैत्र रामनवमी पर केवल 20 भक्तों ने ही रामलला के दरबार में हाजिरी लगाई।
अब प्रतिदिन आठ से 10 भक्त ही रामलला के दरबार पहुंच रहे हैं। यह भक्त भी स्थानीय होते हैं या फिर वीआईपी भक्त दर्शन को पहुंचते हैं। सामान्य दिनों में दर्शन अवधि के दौरान जय श्रीराम के जयघोष से गूंजने वाला रामजन्मभूमि दर्शन मार्ग सहित रामजन्मभूमि परिसर वीरानी में डूबा है।
रामजन्मभूमि मंदिर परिसर से सटे प्राचीन रंगमहल मंदिर के महंत रामशरण दास कहते हैं कि यह आपदा की स्थिति है, ऐसे में हम सभी को इस विषम परिस्थिति में धैर्य व संयम का परिचय देते हुए भजन-पूजन के जरिए विपत्ति निवारण की कामना करनी होगी।
राममंदिर के भूमिपूजन के बाद से तेजी से बढ़ा दान का सिलसिला भी कोरोना के चलते प्रभावित हुआ है। श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट कार्यालय पर जहां प्रतिदिन एक लाख से ऊपर का दान आता था वह अब हजार से भी नीचे पहुंच चुका है।
कार्यालय प्रभारी प्रकाश गुप्ता बताते हैं कि भक्तों के न आने से दान भी थमा है। बताया कि प्रतिदिन एक लाख से अधिक व महीने में 25 से 30 लाख का समर्पण भक्त करते थे। अब हजारों में भी दान नहीं आ रहा है।
बताया कि 19 अप्रैल को चार हजार, 20 अप्रैल को 1600 का दान कार्यालय पर आया जबकि 21 अप्रैल को रामनवमी पर 50 हजार से ऊपर का दान आया। 22 अप्रैल को लगभग 600 रुपये का ही दान आया।