अयोध्या। रामनगरी को पर्यटन की दृष्टि से विकसित करने के लिए अयोध्या से पूरा बाजार तक नया फोरलेन विकसित करने की योजना है। यह सड़क अयोध्या-बिल्वहरि घाट बंधे पर बनाई जाएगी। सड़क नयाघाट से दशरथ समाधि होते हुए पूरा बाजार तक पहुंचेगी।
सड़क निर्माण के लिए अयोध्या बिल्वहरि घाट बंधे को 10 मीटर चौड़ा किया जाएगा। सड़क की लंबाई लगभग 15 किमी. होगी। इसका प्रस्ताव तैयार हो रहा है। शासन की सहमति के बाद डीपीआर भेजा जाएगा। इसके बाद निर्माण की प्रक्रिया शुरू होगी।
अयोध्या में मंदिर निर्माण शुरू होने के साथ अयोध्या को पर्यटन की दृष्टि से विकसित करने की तैयारियां समस्त विभागों की ओर से की जा रही हैं। पर्यटकों व श्रद्धालुओं को अयोध्या तक बिना किसी दिक्कत के पहुंचने के लिए सड़कों का जाल बिछाए जाने की योजना है।
इसी के दृष्टिगत आजमगढ़, बलिया, बिहार व पश्चिम बंगाल के सड़क मार्ग से आने वाले श्रद्धालुओं व पर्यटकों को पूरा बाजार से सीधे अयोध्या पहुंचाने की योजना पर मंथन चल रहा है। इसका प्रस्ताव तैयार हो रहा है। प्रस्ताव के अनुसार अयोध्या-बिल्वहरि घाट बंधे पर पक्की सड़क का निर्माण किया जाना है। सड़क की लंबाई लगभग 15 किमी. होगी। सड़क फोर लेन के मानकों पर बनाई जाएगी।
इसके लिए बंधे को 10 मीटर तक चौड़ा किया जाएगा। बंधे को चौड़ा करने का जिम्मा बाढ़ खंड को व सड़क निर्माण की जिम्मेदारी लोक निर्माण विभाग को सौंपी जाएगी। इसके साथ ही सड़कों के किनारे पेड़-पौधे भी लगाए जाएंगे। प्रस्ताव के अनुसार रामनगरी को सीधे तौर पर पूराबाजार स्थित दशरथ समाधि से जोड़ा जाएगा।
इससे एक फायदा यह होगा कि रामनगरी में आने वाले पर्यटक अयोध्या से सीधे दशरथ समाधि का दर्शन-पूजन कर सकेंगे। दूसरा यह है कि एक नया मार्ग विकसित होने के साथ ट्रैफिक का दबाव भी कम होगा। योजना पर मौजूदा समय में मंथन चल रहा है। इसका प्रस्ताव भी तैयार कराया जा रहा है। शासन की अनुमति के बाद योजना को अमली जामा पहनाया जाएगा।
दशरथ समाधि स्थल के दर्शन से मिल जाती है शनि की साढ़े साती से मुक्ति
अयोध्या के आग्नेय कोण पर सरयू के करीब महाराजा दशरथ का अंतिम संस्कार किया गया था। अब यह स्थान दशरथ समाधि के नाम से जाना जाता है। मान्यता यह है कि यहां दर्शन पूजन से शनि की साढ़े साती का शमन होता है। कथा प्रचलित है कि एक बार महाराजा दशरथ को ज्योतिषों ने बताया कि शनिदेव रोहिणी नक्षत्र का भेदन करने जा रहे हैं। इससे 12 वर्षों तक अकाल व भुखमरी होगी, जिससे मानव जाति को बढ़ा खतरा होगा।
यह जानने के बाद महाराजा दशरथ ने दिव्य धनुष व दिव्य शास्त्रों को लेकर रोहिणी पृष्ठ पर पहुंच गए। इससे भयभीत होकर शनिदेव ने प्रकट होकर दो वर दिए कि शनिवार और खासकर अमावस के दिन मेरी स्तुति व जप करने से मैं उसको कभी पीड़ा नहीं दूंगा। इसी मान्यता के तहत महाराजा दशरथ की समाधि स्थल पर पूरे विधि-विधान से पूजन अर्चन करने पर शनि की साढ़े साती व अढ़ैया के प्रकोप से छुटकारा मिल जाता है।
अयोध्या- बिल्वहरि घाट बंधे पर पक्की सड़क बनाने का प्रस्ताव है। इसके लिए तैयारियां चल रही हैं लेकिन अभी लिखित में कोई प्रस्ताव नहीं मिला है। प्रस्ताव मिलते ही आगे की कार्यवाही शुरू की जाएगी।
एसके प्रसाद, अधिशासी अभियंता, बाढ़ खंड