अयोध्या। सरयू के घाटों पर हरियाली, सूर्योदय होने परसरयू और रामलला के भव्य मंदिर का दीदार। रात तो ऐसी दिखेगी कि मानो आसमान के सारे तारे सरयू में ही उतर आए हों। रामनगरी की नई अयोध्या को लेकर कुछ इसी तरह की परिकल्पना में सरकार जुटी हुई है।
राममंदिर के साथ-साथ अयोध्या को त्रेतायुग की तरह संजाने संवारने का प्लान बन रहा है। देश की पंच नदियों में शामिल सरयू के घाटों को भव्यतम रूप देने की कवायद शुरू हो गई है। पौराणिक वृक्षों का रोपण कर सरयू घाटों की धार्मिक आभा को निखारने की योजना बनी है। राम की पैड़ी से लेकर गुप्तारघाट तक आठ किमी. के क्षेत्र में 1200 पौराणिक वृक्षों का रोपण किया जाएगा।
अयोध्या तीर्थनगरी के रूप में तो प्रतिष्ठित है ही, पर्यटन की भी संभावना से भी सुसज्जित है और यह संभावना श्रीरामजन्मभूमि पर मंदिर निर्माण के साथ बखूबी प्रशस्त हो रही है। भारतीय की सनातनी व धार्मिक धरोहर को सहेजने पर सरकार का पूरा फोकस है।
इसी क्रम में वन विभाग ने सरयू के राम की पैड़ी से गुप्तारघाट के आठ किमी. के क्षेत्र को ग्रीन बेल्ट के रूप में विकसित करने की योजना बनाई है। सरयू घाटों पर पौराणिक काल के वृक्षों का रोपण किया जाएगा। सरयू के सभी घाटों के पास खाली पड़े स्थानों पर पौराणिक काल के करीब 1200 वृक्ष रोपित किए जाएंगे। इसकी तैयारी पूरी कर ली गई है।
वृृक्षारोपण का यह अभियान 17 सितंबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिवस पर प्रारंभ भी हो जाएगा। चूंकि अभी सरयू घाटों के विस्तार का काम चल रहा है। ऐसे में जहां-जहां घाट का निर्माण कार्य पूरा हो जाएगा, वहां वृक्षों का रोपण करा दिया जाएगा। शेष घाटों का निर्माण जब पूरा होगा तब वृृक्ष रोपित किए जाएंगे। वन विभाग के मुताबिक सरयू घाटों पर पौराणिक, ऐतिहासिक वृक्षों बरगद, मौलिश्री, पाकड़, पीपल, गुलमोहर आदि का रोपण किया जाएगा। वृक्षारोपण के लिए घाटों पर स्पेस भी बनाया जा चुका है। वृक्षों को रोपित करने के बाद उन्हें ट्री-गार्ड से सुरक्षित किया जाएगा। बताया गया कि घाटों पर लगने वाले पौध डीप रूट वाले नहीं रहेंगे। जिससे इनकी जड़ें घाटों पर बनी नालियों को डैमेज न कर सकें।
इको-फ्रेंडली होगा नई अयोध्या का स्वरूप
जिस नई अयोध्या को लेकर सरकार खाका खींच रही है वहां ग्रीनरी पर ज्यादा जोर है। अयोध्या के वातावरण को शुद्ध रखने पर पूरा फोकस है। नई अयोध्या का स्वरूप इको-फ्रेंडली होगा। यहां के भवन ग्रीन बिल्डिंग्स के तौर पर डिजाइन होंगे, ताकि अयोध्या के वातावरण की शुद्धता बनी रहे। एक जोर यह भी है कि सरयू घाटों से लेकर पूूूूरे अयोध्या में सॉलिड और लिक्विड वेस्ट को पूरी तरह ट्रीट करने वाली तकनीकी का इस्तेमाल हो, ताकि न सरयू मैली हो और न ही अयोध्या में गंदगी दिखे।
सरयू के घाटों की है पौराणिक मान्यता
सप्तपुरियों में श्रेष्ठ रामनगरी के उत्तर दिशा में प्रवाहित पावन सलिला सरयू के घाटों की पौराणिक मान्यता है। सरयू के हर एक घाट की अपनी कोई न कोई मान्यता है। अयोध्या में लक्ष्मणघाट, सहस्रधारा घाट, शत्रुहन घाट, संत तुलसीदास घाट, रामघाट आदि हैं तो फैजाबाद में गुप्तारघाट का बड़ी ही महत्व है। मान्यता है कि गुप्तारघाट में ही भगवान श्रीराम ने जलसमाधि ली थी। सरयू घाटों के आस-पास कई प्राचीन मंदिर भी हैं, जहां दर्शन-पूजन के लिए बड़ी संख्या में भक्त आते हैं, ऐसे में सरयू घाटों की भव्यता उन्हें आकर्षित करेगी।