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राम मंदिर ट्रस्ट ने खुद ही जांच करके दे दी क्लीनचिट

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अयोध्या। भूमि खरीद को लेकर लग रहे आरोपों की जांच करने के बाद श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने खुद को क्लीनचिट दे दी है। ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष गोविंद देव गिरी ने कहा आरोपों को लेकर हम मीडिया ट्रायल में नहीं उलझेंगे।
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इस बारे में कोई लीगल अथॉरिटी सवाल करेगी तो जवाब देंगे। भूमि खरीद मामले की पिछले तीन दिनों में अधिवक्ताओं व लेखपालों के साथ मिलकर ट्रस्ट ने जांच की है।
जिसके बाद साफ है कि राममंदिर के लिए भूमि खरीद के मामले में किसी प्रकार का कोई घोटाला नहीं हुआ है। सभी तरह की जमीन खरीद संवैधानिक व कानूनी गाइड लाइन के अनुरूप है।
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श्रीराम जन्म भूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की ओर से गुरुवार मणिराम दास की छावनी में गोविंददेव गिरी ने पत्रकारों से कहा कि अयोध्या में भगवान राम की कृपा से मंदिर निर्माण का कार्य आगे बढ़ रहा है।
उम्मीद है कि नियत काल में निर्माण कार्य पूर्ण हो जाएगा और हमारे प्राणभल्लभ भगवान अपने निर्धारित स्थान पर विराजमान होंगे। इसमें अवरोध डालने की कुछ घटनाएं पिछले 15-20 दिनों में घटी हैं।
इसमें कुछ राजनीतिक नेता व तथाकथित धर्माचार्य भी शामिल हैं। इनसे जानकार लोगों को तो कोई आश्चर्य नहीं हुआ लेकिन सामान्य जनता के मन में भ्रम की स्थिति पैदा हो गई है।
बड़े धर्माचार्यों के फोन आए सभी का अनुरोध था कि मैं जाकर देखूं क्या स्थिति है। मैं अपने साथ वकीलों व लेखपालों को लेकर आया। पूरी पड़ताल के बाद सामने आया कि भूमि खरीद में किसी प्रकार की कोई अनियमितता नहीं हुई।
उन्होंने कहा कि न्यास की पहली बैठक से ही मैं स्वत: इसका हिमायती रहा हूं कि हम लोगों को कम से कम 108 एकड़ भूमि तक मंदिर का विस्तार करना चाहिए।
दूसरी बात कि गर्भगृह के आसपास का स्थान, जिसमें हम लोग निर्माण कर रहे हैं उसके चारों ओर परकोटा बनाना है। उस परकोटा के लिए भूमि का आवंटन हम लोगों के पास नहीं था। इसलिए वहां का भूमि लेना अनिवार्य था।
अयोध्या में रहने वाले न्यासी मंडल के सभी सदस्यों की एक समिति बनाई गई। इस पूरी प्रक्रिया को लेकर भ्रष्टाचार, घोटाले शब्दों का प्रयोग कर लोगों को भ्रमित किया गया।
हमारी जांच में यह स्पष्ट हो गया कि मंदिर की दिव्यता व भव्यता के लिए भूमि लेना आवश्यक था। इसके लिए जो भी प्रक्रिया अपनाई गई वह सौ प्रतिशत कानून के अनुसार था। इसमें कुछ भी गैरकानूनी नहीं था।
जो भी भूमि ली गई वह अयोध्या के बाजार भाव अथवा उससे कम कीमत में ही है। पूरे मामले में लोगों को भ्रमित करने का जो प्रयास हुआ उसके पीछे एक ही उद्देश्य लगता है कि भगवान राम के मंदिर के निर्माण कार्य में बाधा डालना।
जिन लोगों ने ऐसा आरोप लगाया है उनसे मेरा आग्रह है कि आप लोग रामकोट में इससे कम मूल्य पर जमीन खरीद कर ट्रस्ट को प्रदान करे तो हम लोग तैयार हैं।
मैं देश को आश्वस्त करता हूं कि जो कार्य हमको सौंपा गया है उसे सार्थक करेंगे। उन्होंने कहा कि अगर आरोप लगाने वालों के मन में किसी प्रकार का राममंदिर के प्रति भाव होता तो वो आकर हमसे मिलते और बताते, कागज देखते।
अगर समाधान न होता तो मीडिया में जाते। छोटे-छोटे प्रश्न सभी के मन में होंगे, हमने सारे कागज देखे हैं लेकिन हम इसका मीडिया ट्रायल नहीं करेंगे।
कोई अधिकृत व्यक्ति या लीगल अथॉरिटी पूछेगा तो पूरे प्रमाण के साथ जवाब देंगे। इस मौके पर ट्रस्टी बिमलेंद मोहन प्रताप मिश्र, कामेश्वर चौपाल, मंहत दिनेंद्र दास, महंत कमलनयन दास मौजूद रहे।
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