राममंदिर मॉडल व उसके आकार को लेकर तस्वीर साफ होने लगी है। मंदिर निर्माण को लेकर मुख्य वास्तुकार चंद्रकांत सोमपुरा के पुत्र आशीष चंद्रकांत सोमपुरा का दावा है कि मंदिर के डिजाइन में बदलाव होगा।
मंदिर पिंक स्टोन से बनेगा और इसमें लोहे का प्रयोग नहीं होगा। 1384 किमी. दूर गुजरात के अहमदाबाद से बृहस्पतिवार को अयोध्या आए आशीष ने यहां 28 घंटे बिताकर श्रीरामजन्मभूमि परिसर से लेकर विहिप की कार्यशाला का दौरा करके तैयारी देखी।
गुजरात लौटने से पहले अमर उजाला से खास बातचीत में उन्होंने साफ कहा कि राममंदिर का मॉडल तो नहीं बदलेगा, मगर डिजाइन में बदलाव होना है। इसी उद्देश्य से उनके जाने से पहले ट्रस्ट ने 18 जुलाई को बैठक बुलाई है।
वे खुद इसमें हिस्सा लेंगे और सदस्यों के बदलाव के सुझावों पर ट्रस्ट के निर्णय के मुताबिक नई डिजाइन तैयार करेंगे। राममंदिर मॉडल जिसे विश्व हिंदू परिषद ने संतों से पूजित कराकर ट्रस्ट को इसी आकार का मंदिर बनाने का दबाव बनाया हुआ है, उसके मुख्य वास्तुकार चंद्रकांत सोमपुरा ने अब राममंदिर निर्माण की कमान अपने बेटे आशीष चंद्रकांत सोमपुरा को सौंप दी है। उनसे बातचीतः
:
आपने श्रीरामजन्मभूमि परिसर से लेकर कार्यशाला का काम दो दिन में देख-समझ लिया है। ऐसे में राममंदिर निर्माण की कितनी तैयारी पूरी हो गई है।
तैयारी तो काफी हद तक हो गई है। फाउंडेशन बनाने के लिए जरूरत के मुताबिक इंजीनियरिंग टीम मौके पर आ गई है। पत्थरों की सफाई का काम भी चल रहा है। पचास फीसदी तराशे गए पत्थर कार्यशाला में मौजूद हैं, बाकी पत्थरों के लिए कांट्रेक्टर से बातचीत चल रही है। मंदिर का आखिरी स्वरूप ट्रस्ट की बैठक में सामने आएगा, आखिर ट्रस्ट क्या चाहता है।
क्या ट्रस्ट के लोग राममंदिर के स्वरूप को बदलने के लिए तैयार दिख रहे हैं।
हां स्वाभाविक है। श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की 18 जुलाई की बैठक इसी विषय को लेकर सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण है। पुराने डिजाइन में नया क्या-क्या चाहते हैं, यह सामने आने के बाद हम डिजाइन में बदलाव करके प्रस्तुतीकरण देंगे। एक चीज तो तय है कि पुराने डिजाइन में ज्यादा कुछ बदलना है नहीं, क्योंकि काफी पत्थर पहले से तैयार हो चुका है। दूसरी बात है कि जनमानस के दिमाग में बाबरी ध्वंस के साथ विश्व हिंदू परिषद ने राममंदिर का जो मॉडल रामलला के साथ सार्वजनिक किया, वह अमिट छाप बना चुका है। राममंदिर कैसा है, यह सब जानते हैं। अब उसको ज्यादा चेंज न करते हुए क्या-क्या अहम बदलाव हो सकता है वह ट्रस्ट तय करेगा। इसके बाद हम कार्यदाई संस्था को नई डिजाइन बनाकर देंगे। अभी फिलहाल मंदिर निर्माण शुरू होने से पहले के सभी काम परिसर में शुरू हो गए हैं। जैसे ही डिजाइन फाइनल होगी, तुरंत काम चालू हो सकता है।
मंदिर बनने में कितनी लागत आएगी ।
अभी डिजाइन मेरे पास फाइनल नहीं है कि वास्तव में कैसा बनना है। ऐसे में सही लागत अनुमानित नहीं हो पाती है। पुरानी डिजाइन के हिसाब से 70 से 80 करोड़ लागत आ रही थी। तब पचास रुपये वर्गफीट पत्थर मिलते थे जबकि अब पांच सौ रुपये वर्गफीट हो गए हैं। अब नए डिजाइन में सामग्रियों की मात्रा तय होने के बाद अनुमानित लागत बता सकते हैं।
कहां-कहां से पत्थर मंगाए जाते हैं, और कौन-कौन से पत्थर हैं।
राममंदिर में सभी पत्थर राजस्थान के भरतपुर से मंगाए गए हैं। इसमें एक ही पत्थर लगते हैं। ये सैंड स्टोन हैं, यानि बलुआ पत्थर, जिसे हम गुलाबी पत्थर भी कहते हैं। अब पत्थरों की डिमांड भी पहले वाली ही है। इसमें कोई बदलाव नहीं हो सकता।
क्या पूरे मंदिर परिसर में सैंड स्टोन लगाए जाएंगे।
पूरे परिसर में तो नहीं लेकिन जो मुख्य मंदिर होगा, वह पिंक स्टोन से बनेगा। आगे डिजाइनर साइट का जो खाका खीचेंगे, उसमें नए पत्थर बाद में तय होंगे। हमारा लक्ष्य मुख्य मंदिर के निर्माण का है, जिसे पहले पूरा करना है। लोहा का प्रयोग हम लोग बिल्कुल नहीं करेंगे। मंदिर के लोअर प्लींथ की डिजाइन अभी भी फाइनल नहीं हुई है, यही नहीं अपर प्लींथ भी तय नहीं है। अब नए बदलाव के बाद भी दोनों डिजाइन हम तैयार करेंगे। हम उनका मंतव्य जानकर ही फाइनल करेगें कि मार्बल कहां लगेगा और ग्रेनाइट का पत्थर कहां लगेगा। पिता जी बताते थे कि अशोक सिंहल की इच्छा था कि फर्स पर मार्बल लगे और प्लींथ ग्रेनाइट का बने।
मंदिर जब बनना शुरू होगा तो मंदिर को शेप लेने में कितना टाईम लगेगा, खासकर सरयू की कछार को देखते हुए।
सरयू का किनारा होने की वजह से नींव की गहराई से लेकर उसकी तैयारी का ढांचा लार्सन एंड ट्रुबो के इंजीनियर तय कर रहे हैं। नींव तैयार होने के बाद पत्थर की लोअर व अपर प्लींथ से लेकर ढांचा खड़ा करने में ज्यादा वक्त नहीं लगेगा। पहले से तैयारी पूरी है। तराशे गए पत्थर पूरी तरह फिनिशड हैं, केवल उस पर लगी काई की सफाई हो रही है। इंस्टालेशन में ज्यादा टाईम नहीं लगेगा। हां, बाकी पत्थरों की तैयारी तेजी से करनी पड़ेगी ताकि निर्माण का तारतम्य जारी रहे। नींव को लेकर मिट्टी की जांच का काम चल रहा है, तय हो रहा कि कितनी गहराई से नींव बनाई जाए। 25 फीट नींव बनेगी या 50 फीट इस पर रिसर्च चल रहा है। एलएंडटी के पास मंदिर बनाने का अनुभव तो नहीं है लेकिन बड़े-बड़े निर्माण करते हैं। मंदिर दीर्घकाल तक अक्षुण्ण कैसे रहेगा, इसका इंस्ट्रक्शन मैंने दिया है।
मंदिर के निर्माण में अधिकतम कितना समय लग सकता है।
ट्रस्ट के निर्णय पर तय होगा कि मंदिर के निर्माण में कितना समय लगेगा। सब कुछ तेजी से चला तो दो से ढाई साल में भव्य मंदिर तैयार हो जाएगा। मंदिर का प्रथम तल बनने में ज्यादा देर नहीं लगेगी, इसकी दीवारें तराशी जा चुकी हैं। सबसे ज्यादा बीम में टाइम लगता है, अभी प्रथम तल की भी काफी बीम तैयार होनी बाकी हैं। नीचे से ऊपर तक जाने वाले आधे से ज्यादा बीम तैयार करना है। उस टाइम भी इतना लंबा पत्थर मिलने में काफी दिक्कत होती थी। आज की तारीख में भी ऐसे बीम को लेकर कांट्रेक्ट हो रहा है। इसलिए समयबद्घता नहीं बता सकता। हमारे कई मंदिर के प्रोजेक्ट सिर्फ बीम की वजह से चार से छह महीने लेट हो चुके हैं।
आपने अपने पिता चंद्रकांत सोमपुरा के साथ मिलकर अब तक कितने मंदिर बनाने का अनुभव लिया है।
हमने सही संख्या तो नहीं गिनी है लेकिन 150 से 200 मंदिर तैयार कर चुके हैं। लंदन, पीट्सवर्ग, बैंकाक, अमेरिका आदि देेशों में भी हमने मंदिर बनाए हैं। हमारे दादा पद्मश्री प्रभाशंकर जी ने सोमनाथ का मंदिर डिजाइन किया था।
राममंदिर की डिजाइन में क्या खास है, जो दूसरे मंदिरों से अलग होगा।
राममंदिर नागर शैली की डिजाइन में बनेगा। यह विष्णु मंदिर की शैली है। इसका गर्भगृह अष्टकोणीय होगा। इसकी परिक्रमा भी गोलाई में होगी। इसके गर्भगृह का आकार 20 गुणे 20 फीट है और शिखर भी इसी आकार में बनता है। यह अष्टकोण में होगा लेकिन देेखने में चौकोर लगेगा। जबकि बाकी सभी मंदिर करीब-करीब चौकोर होते हैं और परिक्रमा भी चौकोर होती है। अभी तय डिजाइन में मंदिर दो मंजिला होगा जिसके भूतल में रामलला की मूर्ति होगी और ऊपर के तल पर रामदरबार होगा। खंभों पर नक्काशी का विशेष ध्यान दिया गया है। सभी कॉलम विशेष तरीके के रूफ वाले हैं। नीचे चार, फिर छह, आठ इस तरीके से मूर्तियां उकेरी गई हैं। मूर्तियां बनाने का काम इंस्टालेशन के बाद है क्योंकि इंस्टालेशन के समय मूर्तियां टूट जाती हैं।
आपके पिता जी ने तो केवल इंटर तक की पढ़ाई कर आपके दादा के सानिध्य में आर्किटेक्ट में नाम कमाया, आपकी शिक्षा क्या है।
मैंने पहले सिविल इंजीनियरिंग की फिर आर्किटेक्ट से डिप्लोमा किया। बल्लभ विद्यानगर अहमदाबाद से दोनों डिग्री लीं।
राममंदिर के लिए आपकी फीस क्या होगी।
ट्रस्ट की मीटिंग के बाद ही इस पर बात हगी। यह सब प्रोजेक्ट में ही कास्ट की जाएगी। अब तक पिता जी ने जितने भी काम किए कोई खर्च नहीं लिया लेकिन अब मौके पर तीन से चार सुपरहवाइजर लगाने पड़ेंगे तो खर्च आएगा। मैं तो पूरी तैयारी करके बैठा हूं। ट्रस्ट की मीटिंग में जैसे ही बदलाव के सभी पहलू सामने आ जाएंगे उसके बाद डिजाइन फाइनल करके काम शुरू हो जाएगा। ट्रस्ट जिस कंपनी को बैठक में डिजाइन हमें देने के लिए कहेगी।