नया ट्रस्ट बनाने की बात फैसले में है ही नहीं। जो पुराने ट्रस्ट हैं उन्हीं में से किसी एक को जिम्मेदारी सौंपी जाएगी। कोर्ट ने कहीं नहीं कहा है कि सरकार नया ट्रस्ट बनाए। जब जगन्नाथपुरी का मुकदमा आया था तब कोर्ट ने कहा था कि धर्मनिरपेक्ष कार्यों में सरकारों का क्या काम है। यह बहुत बड़ी टिप्पणी थी उच्चतम न्यायालय की। 22 नवंबर को भारतीय जनता पार्टी बागपत के सांसद सत्यपाल ने लोकसभा में एक बिल रखा है। उस बिल में उन्होंने कहा है कि सरकार धर्मनिरपेक्ष है।
मंदिरों पर जो अधिग्रहण सरकार ने कर लिया है उसे वापस किया जाए। मंदिर धार्मिक लोगों के अधिकार में होना चाहिए। धर्मनिरपेक्ष सरकार मंदिर में क्या कर रही है। मस्जिद,गिरिजाघरों में क्या करेगी। हालांकि वहां नहीं गई है केवल मंदिरों में गई है। मंदिरों में उसका क्या काम है। धार्मिक स्थानों में धर्मनिरपेक्ष सरकार का हस्तक्षेप नहीं होना चाहिए। उन्होंने कहा कि अयोध्या को धर्मस्थान, उपासना स्थल ही रहने दीजिए, पयर्टन स्थल मत बनाइए।
ट्रस्ट के लिए ठोंका है दावा
रामालय न्यास के सचिव ने कहा कि अयोध्या एक्ट के आधार पर हमने भी ट्रस्ट में भागीदारी का दावा ठोका है। हमारा क्लेम सही है सरकार को पत्र भेजा दिया गया है। 1993 के अधिग्रहण कानून के अनुसार किसी ट्रस्ट को देना है। अब जो दूसरे ट्रस्ट हैं वह उस रूप में नहीं हैं। रामजन्मभूमि मंदिर निर्माण ट्रस्ट भी रामालय ट्रस्ट से जुड़ा है। हमने अपनी दावेदारी की है। धर्माचार्यों की चिंता यह है कि 500 वर्षों के संघर्ष के बाद मिला है तो यह धार्मिक स्थल से इतर स्थल न बन जाए।
अयोध्या मामले में सुप्रीम कोर्ट से जो निर्णय आया है वह समीक्षा का विषय है। रामजन्मभूमि की भूमि मिल गई है लोग मात्र इसी से प्रसन्न हैं। इसकी समीक्षा करने की जरूरत ही नहीं समझी, लेकिन कई ऐसे बिंदु हैं जिनकी समीक्षा की जानी चाहिए। उन्होंने मुस्लिमों को पांच एकड़ जमीन दिए जाने पर भी सवाल उठाया।