शनिवार को आयोजित राष्ट्रीय लोक अदालत से कई दंपतियों की जिंदगी में बहार आई। दिव्यांग महिला को लोक अदालत ने वर्षों से बिछड़े पति से मिलाया तो बेटे को पापा का प्यार मिला। बहुतों को अदालत का चक्कर लगाने से फुर्सत मिल गई अब वह अपनी इच्छानुसार नई जिंदगी जी सकेंगे। दो दंपतियों को बीस साल बाद मुकदमें से निजात मिली।
रौनाही थाना क्षेत्र के पिरखौली निवासी रामअचल कोबिद की शादी वर्ष 1991 में इसी थाना क्षेत्र के डिहवा गांव की शोभा के साथ हुई थी। शोभा दिव्यांग है। दोनों के वैवाहिक जीवन से एक पुत्र अमरजीत उर्फ पिंटू पैदा हुआ। इसी बीच दोनों के रिश्ते में दरार आई और मामला कोर्ट पहुंच गया।
रामअचल ने पत्नी की विदाई के लिए अदालत में दावा दायर किया। इस मुकदमें को सुलह समझौते के आधार पर निस्तारित किया गया। जिससे शोभा को वर्षों से बिछड़े पति का स्नेह मिला तो उसके 11 वर्षीय पुत्र पिंटू को पिता का प्यार।
पूजा यादव निवासी रिखईपुर खजुरहट की शादी 13 मई 2011 को अर्जुन यादव निवासी कैलकेशवपुर के साथ हुई थी। दोनों के रिश्ते में खटास आई और पूजा के मायके वालों ने विदाई से इंकार कर दिया तो पति ने कोर्ट में विदाई का दावा दायर किया।
शनिवार को मामले में सुलह के आधार पर फैसला हुआ और दोनों अपनी इच्छानुसार अलग रहने को स्वतंत्र हो गए। राजकुमारी निवासी काली पांडेय का पुरवा टोनिया थाना पूराकलंदर ने अपने पति के खिलाफ भरण पोषण की याचिका की थी।
इसमें फैसला 27 अगस्त 1999 को हो गया। फिर 27 मई 2008 से भरण पोषण की राशि वसूल करने की याचिका हुई। जिसमें राजकुमारी को पति से भत्ता मिल रहा है। पक्षों की तरफ से मामले में सुलह हो गई। यह मुकदमा लोक अदालत में निस्तारित कर दिया गया।
शांती देवी ने अपने पति से भरण पोषण के लिए मुकदमा 16 मई 1995 को दाखिल किया था। यह वाद भी दोनों पक्षों की तरफ से दाखिल किए गए सुलहनामें के आधार पर निस्तारित किया गया।
लोक अदालत में विभिन्न प्रकार के 45 हजार 553 वाद निपटाए गए। 454 प्रिलिटीगेशन स्तर के वाद निपटाकर दो करोड़ 73 लाख आठ हजार 462 रुपये बैंकों के ऋण की भी वसूली हुई, जबकि पांच लाख 26 हजार 125 रुपये अर्थदंड के रूप में वसूल कर राजकोष में जमा कराया गया।
जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव काशी प्रसाद सिंह यादव के मुताबिक लोक अदालत में 46 प्रतिकर याचिका निस्तारित की गई। इसमें एक करोड़ 43 लाख 21 हजार 932 रुपये मृतकों के आश्रितों को दिलाया गया।
फौजदारी के 7998 वाद भी निस्तारित किए गए। इससे पहले जिलाजज अनिल कुमार ओझा ने कहा कि पंक्ति में खड़े अंतिम व्यक्ति को न्याय देने की मंशा से राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण का गठन किया गया। वह राष्ट्रीय लोक अदालत के उद्घाटन के अवसर पर दीवानी न्यायालय प्रांगण में वादकारियों, बैंक व बीमा के अधिकारियों, अधिवक्ताओं को संबोधित कर रहे थे।