पंचकोसी परिमक्रमा मार्ग स्थित निर्मली कुंड में एक कतार से ट्री-गार्ड तो लगे हैं लेकिन इनके ईंट कहीं-कहीं गिरे हुए है। यहां पर कतारबद्ध ढंग से जो पौधरोपड़ हुए है, उसमें कई सूख गए हैं, कुछ तो अपना वजूद बचाने की जद्दोजहद कर रहे हैं। पौधरोपण कर धरती पर हरी चादर बिछाने की वन महकमे के दावे यहां तार-तार हो रहे हैं।
केस-दो
कैंट मार्ग स्थित रोपे गए पौधों की भी हालत ठीक नहीं है। उचित देखरेख का अभाव यहां पर साफ नजर आ रहा है। ट्री-गार्ड तो दूर से ही दिख रहे हैं लेकिन इनमें रोपे गए पौधे हरे-भरे नहीं हैं। कई ट्री गार्ड में पौधे सूख गए हैं तो कुछ में सूखने की कगार में हैं।
फैजाबाद। बीते वर्ष वन महकमा ने तकरीबन चार लाख पौधरोपड़ करने का दावा किया। जिले के सदर, रुदौली, बीकापुर, मिल्कीपुर और सोहावल तहसील के तकरीबन सौ स्थानों पर बड़े पैमाने पर पौधरोपड़ कार्य हुआ।
पौधों को लगा वन महकमा उसकी सुधि लेना भूल गया। कहीं पर ट्री-गार्ड टूट गया तो कहीं पर पौधे ही सूख गए। पौधों की सुरक्षा के लिए लगाए गए ट्री गार्ड की गुणवत्ता भी मानकों के अनुरूप नहीं थी जिसके कारण पशुओं ने हल्का सा ही धक्का दिया तो ईंट भरभरा कर गिर गए।
सुरक्षा नहीं तो फिर पौधे कैसे बचते। जहां ट्री गार्ड सुरक्षित है, वहां पर पौधों की देखभाल ठीक से नहीं की गई जिसके कारण कई जगहों पर लगे पौधे सूख गए। सूबे में हरियाली को बढ़ावा देने तथा गिनीज बुक में एक दिन में सर्वाधिक पौधरोपड़ किया गया लेकिन इस सूची में सिर्फ 10 जिले थे।
फैजाबाद के प्रभागीय वनाधिकारी डा. रवि कुमार सिंह ने बताया कि रिकार्ड की रेस में फैजाबाद शामिल नहीं था। फिलहाल इसके बाद भी यहां के सभी ब्लाकों में चयनित किए गए तकरीबन सौ स्थानों पर चार लाख पौधों का रोपड़ किया गया।
सूत्र बताते है कि उचित देखरेख के अभाव में इनमें से काफी पौधे बड़े ही नहीं हो पाए। कहीं पर टूट गए तो कहीं पर सूख गए। नदियों के किनारे भी पौधरोपड़ किए गए थे लेकिन वहां की भी हालत ठीक नहीं रही। हर साल वृहद स्तर पर पौधरोपण होता है। लाखों की संख्या में पौधे रोपे जाते हैं, लेकिन गुलिस्तां में हरियाली नहीं आ रही है।
परिक्रमा मार्ग पर ही ट्री गार्ड में लगे पौधे सूख गए हैं। पेड़ लगाने के बाद विभाग भूल जाता है, भीषण गर्मी में भी न पानी दिया जाता है, न ही पशुओं से रखवाली के इंतजाम होते हैं। कैंट के पास भी पौध सूखते मिले। सरयू किनारे गुप्तारघाट से लेकर अयोध्या तक हजारों पेड़ सूख चुके हैं।
नौ लाख पौधरोपण की तैयारी, खोद रहे गड्ढे
फैजाबाद। बन विभाग 9.3 लाख और अन्य विभागों कोतीन लाख पौधरोपण करने का लक्ष्य हैं। इसके लिए धनावंटन भी हो चुका है। वन विभाग नौ लाख गड्ढा खोदने का दावा कर रहा हैं। वित्तीय वर्ष 2016-17 के लिए जिले को शासन से मिले पौधरोपण लक्ष्य पर नजर दौड़ाएं तो इस वर्ष वन विभाग 9 लाख 30 हजार और अन्य विभाग 3 लाख वृक्षारोपण करेंगे।
इसमेें ग्रामीण विकास विभाग, भूमि संरक्षण विभाग, औद्योगिक विकास विभाग, आवास एवं शहरी नियोजन, सहकारिता, लोक निर्माण, सिंचाई विभाग, बिजली, माध्यमिक शिक्षा व बेसिक शिक्षा पौधों की रोपाई कराएगा।
पौधरोपण का मानक वन विभाग के लिए एक हेक्टेयर में 625 पौधे है, जबकि अन्य विभागों का एक हेक्टेयर जमीन पर 650 पौधे। जो पौधे रोपे जाएंगे, उनमें ज्यादातर शीशम, अर्जुन, कंजी, गुटेल, प्रॉस्टिस, पीपल, पाकड़, आम, नीम व अशोक आदि शामिल हैं। वन विभाग की फाइलों में कुल पौधरोपड़ के 70 प्रतिशत पौधों के बचने का दावा किया जाता है।
33 फीसदी की जगह है मात्र 7.5 फीसदी वन क्षेत्र
फारेस्ट सर्वे ऑफ इंडिया की सेंसेस रिपोर्ट 2015 में परिक्षेत्र में 32 सौ हेक्टेयर क्षेत्रफल में वनाच्छादन बढ़ा है। वैसे वन क्षेत्र 33 प्रतशित होना चाहिए, लेकिन है 7.5 प्रतिशत। 2013 से 15 के बीच 8 वर्ग किमी वन क्षेत्रफल बढ़ा है। फैजाबाद, सुल्तानपुर और अमेठी में आठ-आठ सौ हेक्टेयर बाराबंकी में एक हजार और अंबेडकर नगर में छह सौ हेक्टेयर क्षेत्रफल पर वनाच्छादन बढ़ा है।
पिछले साल तकरीबन चार लाख पौधे रोपे गए थे। इसमें तकरीबन 70 फीसदी आज भी जिंदा है। स्थानीय लोग ट्री गार्ड, विक्र गार्ड के पौधे नष्ट करते हैं, होली पर ही कई मामले ऐसे पाए गए। इस साल 9.3 लाख पौधरोपण का लक्ष्य है। प्रति पौध पर 20 रुपये खर्च आता है। पौधरोपण के बाद विभाग साल भर में दो बार सत्यापन कराता है।
-डॉ. आरके सिंह, प्रभागीय वनाधिकारी