जिला अस्पताल समेत सरकारी अस्पतालों की बदहाली से रोजाना जूझ रहे हजारों मरीजों-तीमारदारों की सुध लेने मंगलवार को डीएम समेत प्रशासनिक अधिकारियों ने छापेमारी की तो अव्यवस्था, गंदगी, लापरवाही, मरीजों की पीड़ा खुलकर सामने आ गई।
डीएम किंजल सिंह को अस्पताल परिसर में चारों ओर बाइक, साइकिल और कार की पार्किंग नजर आई। इमरजेंसी के बाहर स्ट्रेचर तक नहीं थी। पानी पीने की समुचित व्यवस्था नदारद रही। और तो और बरामदे में तीमारदार के लिए वार्ड के बाहर न तो बैठने के लिए बेंच थी और न ही पंखे लगे थे।
मरीज और तीमारदारों को गर्मी से बेहाल देख डीएम आगबबूला हो गईं और सीएमएस को कड़ी फटकार लगाई। सुबह सवा दस बजे डीएम जिला अस्पताल परिसर में दाखिल हुई तो हड़कंप मच गया। वह डेढ़ बजे तक एक-एक बिंदु पर गहनता से जांच कीं।
साइकिल स्टैंड की दशा देख दंग रह गईं। चौकी इंचार्ज पतिराम यादव को साइकिल स्टैंड की व्यवस्था दुरुस्त करने का निर्देश दिया। अस्पताल प्रशासन से साइकिल स्टैंड के लिए जमीन तलाशने को कहा। डीएम फिजियोथेरेपी कक्ष से आगे बढ़ीं तो आरओ प्लांट के पास महज चार टोंटी लगी थी।
इस पर उन्होंने नाराजगी जताई। कहा कि प्लांट के आगे तक छत लगाई जाए। चार की जगह आठ टोटियां लगाई जाएं, ताकि एक साथ कई मरीज पानी पी सके। आरओे प्लांट से आगे बढ़ीं तो रेडक्रॉस भवन के पास एक मरीज को चक्कर आ गया।
वहीं धूप में पड़े स्ट्रेचर पर फार्मासिस्ट वीके श्रीवास्तव ने फौरी तौर पर मरीज को लेटा दिया। गरम स्ट्रेचर पर पड़ते ही मरीज उछल पड़ा। इस पर डीएम ने कहा कि मरीज को मार डालोगे। ऐसे ही होता है स्ट्रेचर! स्ट्रेचर सीट कहा हैं? कार्डियक वार्ड में एसी बंद मिला।
बर्न वार्ड की भी एसी नहीं चल रहा था। चादर भी मानक के अनुरूप नहीं मिला। एक बेड पर आधी चादर को बिछा दिया गया था। इस पर डीएम ने सीएमएस डॉ. हरिओम श्रीवास्तव को कड़ी फटकार लगाई। बर्न वार्ड में मरीज के तीमारदारों के लिए भी फेस मास्क और टोपी दिए जाने का निर्देश दिया।
बर्न वार्ड के सामने सिंक लगाने का निर्देश दिया ताकि तीमारदार हाथ-पैर धोकर ही अंदर जा सके। मेडिसिन स्टोर में दवाएं बेतरतीब और बिखरी पड़ी थीं। इस पर डीएम ने नाराजगी जताई। एडीएम सिटी आरएन शर्मा को दवाओं की लिस्ट तैयार करने और इसे क्रमवार रखवाने का सख्त निर्देश दिया। इस मौके पर सीएमओ डा. प्रमोद कुमार भी मौजूद रहे।
दवाओं के एक स्टोर कक्ष के ताले की चाभी तक नहीं मिली। इस पर डीएम के ओएसडी अविनाश चंद्र पांडेय ने खुद ही ताले को तोड़ने की कोशिश की, लेकिन ताला नहीं टूटा। डीएम ने जब तीसरे स्टोर का ताला खुलवाया तो सारी खामियां उभर का सामने आ गईं।
स्टोर में कूड़े के ढेेर में टोपियां और मास्क पड़ी रही। दवाओं के डिब्बों पर धूल की परतें जमी थीं। दर्जनभर से अधिक ब्लड प्रेशर मशीन कूड़े के ढेर में पड़ी रही। नई व्हील चेयर को भी कबाड़ खाने में फेंक दिया गया था, जिसे डीएम ने निकलवा वार्ड में भेजवाया।
डीएम के तेवर देख स्टोर इंचार्ज वीके श्रीवास्तव ने माफी मांगी। स्टॉक को जल्द ही दुरुस्त करने की बात कही। ऑर्थो ओटी में भी वर्षों के खरीदे सामन डंप पड़े पाए गए। डीएम ने मेडिसिन काउंटर, आई, आर्थो, फिजीशियन ओपीडी का भी जायजा लिया।
रोगी सहायता केन्द्र के कर्मचारी आराम फरमाते मिले। एक ही कक्ष में तीन बच्चाें के डाक्टर बैठे मिले। डीएम ने तीनों चिकित्सकों को अलग-अलग कक्ष में बैठने का निर्देश दिया। यही पर मरीजों ने बाहर से दवाएं लिखे जाने की शिकायत की।
इस पर डीएम ने डॉक्टरों को फटकार लगाई कहा कि कोई भी डॉक्टर बाहर से दवा लिख रहा है तो उसके खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई जाएगी। बालरोग विशेषज्ञ डॉ. योगेंद्र यति और डॉ. एके वर्मा यह नहीं बता पाए कि अब तक कितने मरीजों का इलाज किया।
सोहावल के बरसेंडी निवासी श्रवण कुमार के दोनों हाथ की दसों अंगुलियां कटी हुर्ह हैं। फिर भी स्वास्थ्य विभाग से उसे 36 फीसदी का ही निशक्तता का प्रमाण-पत्र जारी किया गया है। पीड़ित ने डीएम को अपनी व्यथा सुनाई। तो उन्होंने कहा सीएमओ साहब देखिए आपक डाक्टर क्या कर रहे।
हाथ की दसों अंगुलियां नहीं और निशक्तता 36 फीसदी। कुछ तो शर्म करो? 90 प्रतिशत का निशक्तता प्रमाण-पत्र बनाओ?