राम मंदिर आंदोलन से जुड़े रहे पूर्व भाजपा सांसद डॉ. रामविलास दास वेदांती ने श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि ट्रस्ट के महासचिव राममंदिर को बर्बाद करने पर तुले हैं। राममंदिर को जानबूझकर छोटा बनाने का प्रयास है। जबकि सरकार ने गगनचुंबी मंदिर बनाए जाने की मंशा जाहिर की थी। वेदांती ने कहा कि मंदिर आंदोलन में संतों की अहम भूमिका रही है, लेकिन मंदिर निर्माण के समय सरकार द्वारा गठित ट्रस्ट अयोध्या के संतों को भूल बैठी है। मंदिर निर्माण कार्य में संतों का कोई भी मत नहीं लिया गया है।
उन्होंने कहा कि राम मंदिर के पक्ष में आए फैसले के बाद सरकार द्वारा गठित ट्रस्ट की देखरेख में मंदिर निर्माण का कार्य शुरू हो चुका है। ट्रस्ट के महासचिव ने अयोध्या में डेरा डाल रखा है, लेकिन अयोध्या के संतों को इस कार्य से दूर रखा गया है। इससे राम मंदिर आंदोलन से जुड़े हुए संत काफी नाराज हैं।
जबकि, ट्रस्ट के लोग काफी दिनों से अयोध्या में हैं। इस दौरान उन्होंने किसी भी संत से मुलाकात भी नहीं की। वह सिर्फ कुछ राजनीतिक लोगों से ही मुलाकात कर रहे हैं। उन्होंने ट्रस्ट के एक सदस्य पर निशाना साधते हुए कहा कि बसपा से चुनाव लड़ कर खुले मंच से राम मंदिर का विरोध करने वाले को ट्रस्ट में जगह दी गई है।
राम मंदिर के लिए जिन लोगों ने खून-पसीना बहाया। ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय ने उनसे मिलना तक उचित नहीं समझा। एक महीने से वह अयोध्या में हैं जो सिर्फ कोरोना का बहाना बताकर कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, बसपा पार्टी के नेताओं से मुलाकात कर रहे हैं। वे संतों से राय लेने के बजाए इन पार्टियों से राय ले रहे हैं, यह उचित नहीं है।