सरकार से तल्खी के बाद वीआरएस मांग चुके प्रमुख सचिव सार्वजनिक उद्यम डॉ एसपी सिंह शुक्रवार को अपनी जानी-पहचानी रौ में दिखे। कहीं से जल्दबाजी नहीं थी। गांव वालों और अफसरों से बातचीत में मजाकिया अंदाज जहां काम-काज की पोल खोलता रहा, तो हर कोई सहज हो अपनी व्यथा व हकीकत बताता दिखा।
गड़बडिय़ों व लापरवाहियों पर अफसरों के होश उड़ रहे थे। कामचोर.. सरकार का धन बर्बाद करते हो..तफरी करने आए हो क्या.. गिरेबान में झांको..कार्रवाई करनी पड़ेगी..। ऐसे तल्ख शब्द बेसिक शिक्षा अधिकारी, समाज कल्याण अधिकारी, आईटीआई प्राचार्य समेत कइयों को सुनने पड़े।
डॉ. एसपी सिंह यूपी सरकार पर भी बरसते रहे, बोले- एक-एक करोड़ रुपए लेकर अधिकारियों की नियुक्ति हो रही है। सीएचसी के डॉक्टरों ने बिजली कटौती का रोना रोया तो बोल पड़े.. 45-45 लाख रुपए लेकर एमबीबीएस में प्रवेश दिए जा रहे हैं। 20 हजार करोड़ रुपये बजट पावर कॉर्पोरेशन खा जाता है। इसमें नीचे से लेकर ऊपर तक लोग शामिल हैं।
मवई ब्लॉक क्षेत्र के 2014-15 में डॉ. राम मनोहर लोहिया योजना में चयनित समग्र गांव मोहम्मदपुर दाउदपुर गांव में शुक्रवार को ग्रामीणों की विभिन्न शिकायतों पर प्रमुख सचिव एसपी सिंह ने कहा कि 34 साल की नौकरी कर चुका हूं मैं, नीचे का सारा हाल जानता हूं।
करीब सवा बजे पहुंचते ही सबसे पहले चौपाल लगाई। प्रमुख सचिव सिंह के समक्ष लोगों ने शिकायतों की झड़ी लगा दी। यहां के विजय ने तालाब की खोदाई न होने की शिकायत की, जिस पर उन्होंने बीडीओ शिव प्रसाद को फटकार लगाई। कौशल विकास मिशन के प्रशिक्षण पर प्रमुख सचिव ने शाह मोहम्मद नामक युवक से पूछा कि कितने दिन प्रशिक्षण लिया, तब उसने बताया कि 10 दिन।
इस पर प्रमुख सचिव के तेवर तल्ख हो गए। उन्होंने आईटीआई फैजाबाद के प्रधानाचार्य सुधीर कुमार श्रीवास्तव को बुला लिया, सवाल दागा 10 दिन कैसे कराया प्रशिक्षण, प्रधानाचार्य ने जवाब दिया कि पांच छात्रों को प्रशिक्षण दिया गया, जिसमें से दो दुबई चले गए।
इसी बात पर प्रमुख सचिव ने कहा कि तीन माह का प्रशिक्षण 10 दिन में कैसे पूरा हो सकता है। उन्होंने पुन: प्रशिक्षण दिलाने के लिए निर्देशित किया। जिला समाज कल्याण अधिकारी रामचन्द्र दुबे ने 2010-11 की वृद्धावस्था पेंशन की सूची उनके सामने पेश की। जिससे वह नाराज हो गए और खरी-खोटी सुनाते हुए कहा कि तफरी करने आए हो क्या?
बीएसए प्रदीप कुमार द्विवेदी पर प्रमुख सचिव इसलिए बरसे कि जहां चौपाल लगी थी, उस प्राथमिक विद्यालय में पंजीकृत 90 छात्रों में से सिर्फ 30 ही मौजूद थे। प्रमुख सचिव ने ग्रामीणों से पूछा कि यहां कुल कितने युवा हैं, जवाब आया लगभग 700, तब उन्होंने विदेश में रहने वाले युवाओं की जानकारी ली। जिस पर लोगों ने 100 लोगों के विदेश में होने की बात बताई।
उन्होंने अपने ही देश में रहकर रोजगार करने की सलाह दी। कहा कि विदेश में मजदूरी करने की क्या आवश्यकता। इसके बाद आवास आवंटन, मत्स्य पालन के लिए तालाब आवंटन, भूमि पट्टे व अन्य राजस्व संबंधी जानकारी ली।
ग्रामीणों ने उनसे शिकायत की कि आपके आने से तीन दिन पहले से मवई चौराहा से लेकर गांव तक सड़क के गड्ढों को मिट्टी डालकर पाट दिया गया, कई नालियों का निर्माण करा दिया गया, गांव में सफाई कराई गई और अधूरे कार्य भी पूरे कराए गए। इस पर उन्होंने कहा कि बड़े अफसरों के आने से यही फायदा है कि अधिकांश काम करा लिए जाते हैं।
मैंने वीआरएस जरूर मांगा है, लेकिन सेवा के अंतिम दिन तक काम उसी ईमानदारी और तत्परता करता रहूंगा। मुझे राजनीति में जाने का कोई सगल नहीं है, लेकिन चाहता हूं कि सरकार, शासन और नीचे तक के अफसर ईमानदारी से दायित्व निभाएं। अब काम करने का माहौल यूपी सरकार में नहीं दिखता। यूपी में एक-एक करोड़ रुपए लेकर अधिकारियों की नियुक्ति हो रही है। 45-45 लाख रुपए लेकर एमबीबीएस में प्रवेश दिए जा रहे हैं। 20 हजार करोड़ बजट पावर कॉर्पोरेशन को मिलता है, मगर गांव में आने पर पता चलता है कि सब खा जाते हैं। इसमें नीचे से लेकर ऊपर तक लोग शामिल हैं। - डॉ. एसपी सिंह, प्रमुख सचिव, सार्वजनिक उद्यम
रुदौली सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में में 808 महिलाओं का प्रसव कराए जाने की जानकारी सीएचसी अधीक्षक डॉ. अजय मोहन ने प्रमुख सचिव को दिया। जिसमें से 300 महिलाओं को जननी सुरक्षा का लाभ खाता न होने से न मिल पाने की जानकारी दी। इस पर खाता खोलवाकर शीघ्र उन्हें भी इसका लाभ दिलाने के निर्देश दिए।
प्रमुख सचिव ने एक्स-रे कक्ष, पैथालॉजी, लेबर रूम का भी जायजा लिया। उन्होंने चिकित्सक डॉ. मदन बनर्वाल से भी ओपीडी में आने वाले मरीजों के बाबत जानकारी ली। काशीपुर के शिवनारायन से भी समस्या संबंधित जानकारी ली।