प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पूर्व प्रधान सचिव व श्री राम मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्रा ने एक इंटरव्यू में बताया कि श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र को बिहार, छत्तीसगढ़ और नेपाल में भगवान राम से जुड़े स्थानों के नवीनीकरण की मांग मिल रही है। उन्होंने कहा कि उन्होंने यह जिम्मेदारी स्थानीय लोगों पर छोड़ने का फैसला किया है। मिश्रा ने कहा कि जनवरी में जनता के लिए राम मंदिर खुलने के बाद अयोध्या में आर्थिक गतिविधियां बढ़ने की उम्मीद है।
उन्होंने कहा कि 'जैसे-जैसे पैसा आएगा, लोगों के पास कई अवसर होंगे और इन अवसरों के साथ-साथ क्षेत्र में निवेश भी बढ़ेगा। हमें होटल बनाने के लिए 16 आवेदन प्राप्त हुए हैं और स्मार्ट सिटी की योजना भी प्रगति पर है।' ट्रस्ट के सदस्य मिश्रा ने बताया कि अयोध्या में परिवहन में सुधार के लिए एक मास्टर प्लान पर काम किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि एक दिन अयोध्या का विस्तार राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली की तरह करना होगा।
उन्होंने कहा कि वर्तमान अयोध्या शहर में अपेक्षित आगंतुकों की भारी संख्या और इसकी बढ़ती आबादी को संभालने के लिए सुसज्जित नहीं है। उन्होंने कहा कि अयोध्या की वर्तमान जनसंख्या लगभग 3.5 लाख है और अनुमान है कि मंदिर के उद्घाटन के बाद आर्थिक गतिविधियों में वृद्धि के बाद आगंतुकों और अन्य लोगों के रूप में पांच लाख लोग और जुड़ जाएंगे। उन्होंने कहा कि यह आबादी चुनौती भी है और अवसर भी है। स्थानीय लोग आगंतुकों को किफायती दरों पर अपने घरों में आवास प्रदान कर सकते हैं। यह सच है कि इस क्षेत्र का विस्तार करने की जरूरत है।
नृपेंद्र मिश्रा कहा कि राज्य सरकार को क्षेत्रों के विस्तार के लिए उचित कदम उठाने की आवश्यकता होगी, जिसमें अयोध्या के आसपास के क्षेत्रों को नामित करना और अनधिकृत निर्माण को रोकना शामिल है। यह पूछे जाने पर कि क्या ट्रस्ट देश के विभिन्न हिस्सों में भगवान राम से जुड़े अन्य स्थानों का भी विकास कर सकता है मिश्रा ने कहा कि ट्रस्ट की फिलहाल ऐसी कोई योजना नहीं है।
उन्होंने स्वीकार किया कि नवीकरण की मांग बिहार के बक्सर और छत्तीसगढ़ के बस्तर जैसे स्थानों और यहां तक कि नेपाल से भी आई है। उन्होंने कहा कि ट्रस्ट का मानना है कि उसे इस तरह से विस्तार कार्यक्रम नहीं शुरू करना चाहिए, बल्कि इसे स्थानीय लोगों पर छोड़ देना चाहिए। उन्होंने राम मंदिर निर्माण के दौरान उठे भूमि विवादों को भी खारिज किया और दावा किया कि अब कोई विवाद नहीं है. ट्रस्ट को नजूल भूमि के रूप में जानी जाने वाली विवादित भूमि के कारण आलोचनाओं का सामना करना पड़ा। नज़ूल भूमि उसे कहते हैं जिस पर किसी का मालिकाना हक नहीं होता।