रोजादार प्रतिदिन तराबी की बीस रकात और ईशा की सत्रह नमाज अतिरिक्त पढ़कर पूरी कुरआन शरीफ सुनते हैं। उधर शुक्रवार से शुरू हो रहे रोजा के सहरी और अफ्तार के लिए सामानों की खरीद फारोख्त पूरी हो गई। बूढ़े, बच्चे और जवानों के साथ महिलाएं भी खरीदारी में जुटी रहीं।
साप्ताहिक बंदी का दिन होने के बावजूद गुरुवार को तमाम दुकानें खुलीं। चौक में फुटपाथ पर सजी दुकानों पर खरीदारों का मेला रहा। मरकजी अंजुमन तब्लीग अहले सुन्नत जामा मस्जिद टाटशाह के महासचिव अफजाल अहमद ने बताया कि रात आठ बजे ईशा की नमाज के बाद नगर से लेकर गांव तक मस्जिदों में तराबी शुरू हो गई।
मौलानाओं और मौलवियों ने रमजान व तराबी की फजीलत बयां की। बताया इसी महीने में कुरआन-ए-पाक नाजिल हुई। कुरआन-ए-पाक की अजमत बयां करते हुए कहा गया कि इसे पढ़ने से इंसान दुनिया भर की बुराइयों से बचता है। इसमें दुनिया की छह हजार बीमारियों व इलाज का जिक्र है।
दावा किया कि दुनिया के डॉक्टरों ने ढाई हजार बीमारियों का इलाज तो तलाश लिया, लेकिन साढ़े तीन हजार का इलाज अब तक नहीं ढूंढ सके हैं। कुरआन-ए-पाक में ऐसी बीमारियों का इलाज है। यही वजह है कि मरीज जब दुनियावी इलाज से हार जाता है तो रुहानी इलाज के लिए वह वलियों व बुजुर्गों की मजारों पर इलाज कराने के लिए जाता है।
मौलानाओं ने रमजान माह को बरकतों का महीना कहा। बताया रमजान महीने में की गई इबादत का अल्लाह सत्तर हजार गुना सबब देता है। कहा, मस्जिदों में एक से डेढ़ घंटे तक तरावीह हुई। इसके साथ ही सभी घरों में रोजेदारों की ओर से एक माह तक कुरआन की तिलावत का काम शुरू हो गया। कोई एक दिन में एक तो कोई दो-तीन कुरआन सामर्थ्य के अनुसार पढ़ेगा।