बेमौसम बारिश से हुए नुकसान को जिला प्रशासन द्वारा कराए गए सर्वे के आधार पर 13964 हेक्टेयर गेहूं की फसल में 33 फीसदी से ज्यादा नुकसान हुआ था। किसानों को सहायता देने के लिए जिले को अब तक 22.47 करोड़ रुपये ही मिल पाए हैं।
कम से कम आठ करोड़ 10 लाख रुपये अभी जिले को और मिले तो पहले कराए गए सर्वे के लिए राहत दी जा सके। फरवरी और मार्च में ओलावृष्टि व बेमौसम बारिश से पूरे जिले में गेहूं की फसल तबाह हो गई। करोड़ों रुपये के गेहूं का नुकसान होने की आशंका है।
काफी दिनों तक सरकार इस पर नहीं चेती। बची-खुची फसल की मड़ाई का कार्यक्रम शुरू हुआ। फसल बर्बादी को लेकर किसानों की मौत के बाद सरकार की किरकिरी हुई तो प्रदेश सरकार ने इसके गाटावार सर्वे का निर्देश दिया। लेकिन तब तक आधी फसलों की मड़ाई हो चुकी थी।
पखवारे भर तक हीलाहवाली के बाद लेखपालों ने सर्वे किया तो जिले में 13964 हेक्टेयर फसल ऐसी चिह्नित की गई। जिसमें 33 फीसदी से ज्यादा नुकसान माना गया। इसके बाद किसानों को कम से कम 15 सौ रुपये और 18 हजार रुपये प्रति हेक्टेयर के आधार पर अनुदान दिए जाने वाले धन का आकलन किया गया।
बताया गया है कि 18 हजार रुपये प्रति हेक्टेयर के आधार पर जिले में 25.13 करोड़ रुपये की आवश्यकता बताई गई। इसके साथ ही 1500 रुपये प्रति कृषक के आधार पर किसानों को देने के लिए 30.57 करोड़ रुपये की मांग की गई। लेकिन किसानों को अब तक राशि भी नहीं मिल पाई है।