अयोध्या। सरकार कोरोना की तीसरी लहर से बच्चों को बचाने के लिए तैयारियां तो तेजी से कर रही है, लेकिन इलाज करने वालों के अभाव में संसाधन व तैयारियों का उपयोग नहीं हो पाएगा। जिले में बच्चों व बेहोशी के चिकित्सकों के आधे से अधिक पद रिक्त हैं।
जिले में जनपद स्तरीय अस्पतालों में जिला अस्पताल, महिला अस्पताल, राजकीय श्रीराम चिकित्सालय, राजर्षि दशरथ मेडिकल कॉलेज दर्शननगर व 100 बेड का कुमारगंज अस्पताल संचालित है। इसके अलावा ग्रामीणांचल में 14 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र हैं।
इन अस्पतालों में संसाधन तो कमोवेश मौजूद हैं, लेकिन सेवाएं देने वालों का ही अकाल है। यूं तो लगभग सभी विशेषज्ञों की कमी विद्यमान है, लेकिन तीसरी लहर में अहम रोल अदा करने वाले बाल रोग विशेषज्ञों व बेहोशी के चिकित्सकों की कमी सब पर भारी पड़ने वाली है।
सभी 14 सीएचसी पर एक-एक पद बाल रोग विशेषज्ञ व बेहोशी के डॉक्टर का है।, जिसके सापेक्ष मात्र सात डॉक्टर ही तैनात हैं। मंडल मुख्यालय के 212 बेड के जिला अस्पताल में भी बाल रोग व बेहोशी के तीन-तीन पद स्वीकृत हैं।
जिसके सापेक्ष सिर्फ एक-एक चिकित्सक ही तैनात है। इसी तरह मेडिकल कॉलेज में बाल रोग के चार के सापेक्ष तीन व एनेस्थेसिस्ट के छह के सापेक्ष चार की तैनाती है। जिला महिला अस्पताल में बाल रोग के दो व एनेस्थेसिस्ट के पांच में से चार पद रिक्त हैं।
इस तरह सहज की अंदाजा लगाया जा सकता है कि यदि दुर्भाग्य से तीसरी लहर ने आतंक मचाया तो चिकित्सकों के अभाव में कैसे पार पाया जा सकेगा।
जिले में विशेषज्ञ चिकित्सकों की पहले से ही कमी है। ऊपर से बाल रोग विशेषज्ञ व बेहोशी के चिकित्सकों की कमी ज्यादा है। इसके लिए शासन स्तर पर पत्राचार कई बार किया जा चुका है। उम्मीद है कि शीघ्र ही कुछ चिकित्सकों की तैनाती हो सकती है।-डॉ. घनश्याम सिंह, सीएमओ, अयोध्या
वर्जन :
अस्पताल में कुल स्वीकृत चिकित्सकों के सापेक्ष करीब आधे पद रिक्त हैं। एक-एक फिजीशियन, बाल रोग विशेषज्ञ, एनेस्थेसिस्ट, पैथोलॉजिस्ट के सहारे कार्य चलाया जा रहा है। जबकि, मंडल मुख्यालय का जिला होने के कारण मरीजों का अतिरिक्त भार है। चिकित्सकों के इंतजाम के लिए पत्राचार किया गया है।-डॉ. सीबीएन त्रिपाठी, सीएमएस, जिला अस्पताल, अयोध्या