अयोध्या। या हुसैन अलविदा... की सदाओं के बीच शनिवार को कर्बलाओंं में ताजियों को सुपुर्द-ए-खाक किया गया। नगर क्षेत्र में राठ हवेली, काश्मीरी मोहल्ला, मोती मस्जिद, हैदरगंज, हसनू कटरा, वजीरगंज जप्ती समत अन्य स्थानों से जुलूस निकला। बड़ी बआ पर विभिन्न क्षेत्रों से ताजियों व अलम के जुलूस पहुंचे। यहां मेला भी लगा। सुरक्षा के कड़े इंतजाम रहे। जुलूस वाले रास्तों पर रूट डायवर्जन किया गया था।
रुदौली क्षेत्र में मोहर्रम का पर्व अकीदत व एहतराम के साथ मनाया गया। इस अवसर पर शोहदा-ए-कर्बला की शहादत की याद में हमेशा की तरह अकीदतमंदों ने चौक पर ताजियादारी की। कर्बला के मंजर को याद कर ताजियादार और अकीदतमंद गमगीन थे। ताजिया का जुलूस परंपरागत मार्गों से गुजरता हुआ कर्बला पहुंचा जहां पर ताजियों को दफना दिया गया। इसमें तालुकेदार पूर्व विधायक अब्बास अली जैदी उर्फ रुश्दी मियां सहित परिवार के लोग भी शामिल रहे। सीओ रुदौली सतेंद्र भूषण तिवारी ने बताया कि तहसील क्षेत्र में रखे गए कुल 1037 ताजियों को पुलिस की कड़ी अभिरक्षा में क्षेत्र की 140 कर्बलाओं में सुपुर्दे खाक किया गया।
बीकापुर कोतवाली क्षेत्र में ताजिया का जुलूस निकालने के दौरान मोहम्मद साहब के नवासे हजरत इमाम हुसैन की शहादत को याद कर नौहाख्वानी और सीनाजनी कर गम का इजहार किया गया। तारुन थाना क्षेत्र में 9 कर्बला के 26 स्थानों पर 44 ताजिये शिद्दत से दफन किए गए। मो. मोबिन ने बताया कि नारायनपुर व लालगंज की ताजिया पखरपुर मोड़ के पास दफन की गई, यहां मेले का आयोजन हुआ। पूरा बाजार में पूरा बाजार, राजेपुर, भगवभीट, कुडर्की, बिल्हरघाट गाँवों में जुलूस निकाला गया।
सुरक्षा के इंतजाम रहे सख्त
मोहर्रम के जुलूस के दौरान सुरक्षा के कड़े इंतजाम रहे। सभी जुलूसों में आरएएफ, पीएसी व महिला-पुरूष पुलिस के जवान तैनात रहे। वाटर कैनन, दंगा नियंत्रण वाहन वज्र, अग्निशमन वाहन भी जगह जगह तैनात रहा। शहरी क्षेत्र में रूट डायवर्जन भी लागू किया गया था। यहां बैरियर लगाकर यातायात व पुलिस के जवानों की तैनाती की गई थी। एसएसपी राजकरन नय्यर, एसपी सिटी मधुबन सिंह, सीओ सिटी शैलेंद्र सिंह, सीओ अयोध्या एसपी गौतम व मजिस्ट्रेट अपनी टीम के साथ गश्त करते रहे।
इमामबाड़े में रखा है 102 साल पुराना चांदी का ताजिया
रुदौली/भेलसर।। रुदौली में शिया समुदाय की इरशाद मंजिल जिसे इमामबाड़ा के नाम से भी जाना जाता है। यहां गदर फिल्म सहित कई फिल्मों व धारावाहिक की शूटिंग भी हुई है। यह इकलौता ऐसा इमामबाड़ा है जहां 102 साल पुराना चांदी का ताजिया रखा है। इसे देखने के लिए लोगों को मोहर्रम माह में सिर्फ 10 दिनों का ही समय मिलता है। इस इमामबाड़े का निर्माण 1922 में हुआ था। यहां चांदी का ताजिया अलम भी रखा है। इसमें 4 झाड़ याकूत, 2 झाड़ रूबी माणिक, 2 झाड़ फिरोजा के लगे हुए हैं। इसे सन 1922 में बेल्जियम से मंगाया गया था। इस इमामबाड़े को रुदौली के ही कारीगर यूसुफ द्वारा तैयार किया गया था।