16-अयोध्या-ताजीए मदफून करने ले जाते अकीदतमंद
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अयोध्या। जिले में मुस्लिम समुदाय के लोगों ने मोहर्रम की 10 तारीख को कर्बला के 72 शहीदों को पुरसा देते हुए ताजिये दफन किए। शहर के तमाम मुस्लिम घरों में दिन भर मातम मजलिस व दुआख्वानी का दौर चला। घरों से दिनभर या हुसैन व या अली की सदाएं बुलंद होती रहीं। कर्बला के शहीदों की याद में शिया समुदाय के लोगों ने फाकाकशी की तो सुन्नी समुदाय के लोगों ने यौमे आशूरा के रोजे का एहतेमाम किया।
शहर में मोहर्रम माह के आगाज के साथ ही मुस्लिम घरों में मजलिस मातम नोहाख्वानी का दौर शुरू हो गया था। घर घर में आजा खाने सज गए थे। गुरुवार की शाम 9 मोहर्रम की सुबह से ही मुस्लिम समुदाय के लोग कर्बला के 72 शहीदों के गम में डूब गए। घरों में पूरी रात मजलिस, मातम नोहाख्वानी व सीनाजनी का दौर चला। लोग इमाम हुसैन अस. के गम में बदहवास नजर आए। सुबह होते ही लोग अजाखानों से ताजिए लेकर कर्बला व कब्रिस्तान पहुंचे। यहां पूरी अकीदत से कोविड प्रोटोकॉल के तहत ताजिये मदफून किये गए। इसके बाद लोगों ने कर्बला में फातिहा व सालम पढ़ा। ताजिये मदफून होने के बाद लोग सीधे अपनी मस्जिदों में पहुंचे। शिया समुदाय की मस्जिद में आमले आशूरा हुआ। घरों में मजलिस व मातम का दौर चलता रहा। सुन्नी समुदाय के लोगों ने यौमे आशूरा का रोजा रखा। दिनभर इबादत का दौर चला। शहर में खुर्द महल, बनी खानम का मकबरा, वजीरगंज जप्ती, बड़ी बुआ, साहबगंज, देवकली अब्बू सराय समेत कई कब्रिस्तानों में ताजिये मदफून हुए।
शामें गरीबां में छलके अजादारों के आंसू
कर्बला के 72 शहीदों की याद में शाम के 8:30 बजे इमामबाड़ा जवाहर अली खान शामे गरीबा की मजलिस हुई। मजलिस में इस्लाम धर्म के प्रवर्तक मोहम्मद साहब के खानदान पर हुए मसावात को सुन अकीदतमंद फफक फफक कर रोने लगे। मजलिस को खिताब करते हुए साकेत महाविद्यालय के प्रोफेसर डॉ. मिर्जा साहब ने बताया कि इमाम हुसैन अस. के शहीद हो जाने के बाद यजीदी फौज ने खेमे को पूरी तरह से आग लगा दी। इमाम के खानदान की औरतें खेमे में आग लगने के बाद खुले आसमान के नीचे जमीन पर बैठकर बदहवासी हालात में रो रही थीं। शामे गरीबा की महफिल में पूरी तरह अंधेरा रहा।
अलर्ट रहा पुलिस व प्रशासन
शहर में प्रशासन की गाइड लाइन के अनुसार कोविड-19 प्रोटोकॉल का पालन करते हुए ताजिए दफन किए गए। शहर के सभी कब्रिस्तान व मुस्लिम मोहल्लों में पुलिस व प्रशासन पूरी तरह से सक्रिय रहा। लोग घरों से दो-दो की तादाद में निकल कर कब्रिस्तान पहुंचे और ताजिए दफन किया। जिला ताजियादारान कमेटी के सचिव मोनू मिर्जा ने बताया कि शहर में सुबह 5:00 से 8:00 के बीच ताजिए प्रशासन की गाइड लाइन के अनुसार दफन हो गए। कहीं कोई अप्रिय बात नहीं हुई है।