स्वास्थ्य राज्य मंत्री सुधीर रावत बुुधवार को दोपहर करीब 12:30 बजे अचानक जिला अस्पताल पहुंचे तो अफरातफरी मच गई। वे सबसे पहल इमरजेंसी से आर्थो वार्ड में गए और वहां का जायजा लिया।
मरीज तो एक स्वर में बोले दवा अंदर से मिलती है। डॉक्टर देखभाल करते हैं। फिर भी खामियां छिप न सकी। मरीजों के बेड से अस्पताल का कंबल नदारद मिला तो डॉक्टरों के बदन पर एप्रिन नहीं तक नहीं पाई गई।
अस्पताल परिसर में कूड़े का ढेर जमा दिखा। रैन बसेरे में ताला लगा था। कदम-कदम पर अव्यवस्था देख मंत्री बिफर पड़े। सीएमओ से लेकर सीएमएस तक को फटकार लगाई।
अस्पताल में घुसते ही एक परिवारीजन ने मंत्री से शिकायत की। मोतीगंज हैरिंग्टनगंज के रहने वाले राकेश कुमार पांडेय ने बताया कि उसकी मां घर पर गिर गई थी। अस्पताल में डॉक्टर को दिखाया तो उन्होंने सीटी स्कैन कराने की सलाह दी।
सीटी स्कैन कराने गया तो कर्मचारी ने यह कहते हुए मना कर दिया कि प्लेट नहीं है। बाहर सीटी स्कैन के लिए गया तो वहां पर 2200 रुपया लग रहा है जो हमारे पास नहीं है।
इस पर नाराज मंत्री ने सीटी स्कैन कक्ष पहुंच कर प्लेट के बारे में जानकारी ली तो मौके पर चार प्लेट मिली। मंत्री ने प्रमुख अधीक्षक डॉ. एसी तिवारी और टेक्नीशियन अनिल सिंह को फटकार लगाई।
स्वास्थ्य मंत्री जिला अस्पताल के अंदर से होते हुए महिला अस्पताल चले गए। रास्ते में कूड़े की ढेर और उससे उठती दुर्गंध देख कर हतप्रभ रह गए। उन्होंने जिला अस्पताल के प्रमुख अधीक्षक और सीएमओ को कड़े शब्दों में चेतावनी दी।
कहा कि अस्पताल में इतनी गंदगी है तो मरीजों का क्या होगा? महिला अस्पताल में भी चारों ओर गंदगी दिखाई पड़ी। क्षेत्रीय निदान केन्द्र परिसर में भी चारों ओर कूड़े के ढेर जमा थे।
यहां पर हर कोई अपनी जिम्मेदारी से बचता नजर आ रहा था। प्रमुख अधीक्षक ने कहा कि अस्पताल परिसर महिला सीएमएस का है। महिला सीएमएस डा. नीरजा माला ने बताया कि निर्माण कार्य चल रहा है, इसलिए गंदगी है।
निरीक्षण में जिला अस्पताल और महिला अस्पताल का रैन बसेरा बंद मिला। इतनी अव्यवस्था देखकर मंत्री बोले कि मैं कुछ नहीं जानता। सफाई के लिए ठेके पर कर्मचारी दिया हूं। अस्पताल साफ होना चाहिए।
मर्च्युरी जाने वाला रास्ता खराब होने पर मंत्री ने दो टूक शब्दों में प्रमुख अधीक्षक से कहा कि एक सप्ताह में सुधार कर लो वरना अगली कार्रवाई के लिए तैयार रहो।