प्रथम स्वतंत्रता संग्राम के दिनों की लगी चित्र-प्रदर्शनी ने लोगों को देशभक्ति की भावना से भर दिया। लोगों ने प्रथम स्वतंत्रता संग्राम के शहीदों के प्रति श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए उनकी कुर्बानियों को याद किया।
प्रदर्शनी में मेरठ छावनी, दिल्ली, कानपुर, इलाहाबाद, लखनऊ व बिहार के जगदीशपुर तक की लड़ाइयों के मार्मिक दृश्य व शहीदों के चित्र लगाये गये थे। सिविल लाइंस स्थित एक होटल के सभागार में अशफाक उल्लाह खां मेमोरियल शहीद शोध संस्थान की ओर से लगी प्रदर्शनी का उद्घाटन मंडलायुक्त सूर्यप्रकाश मिश्र ने किया।
कहा कि सामान्यत: कोई ऐसे कार्यों में रुचि नहीं दिखाता है। ऐसे में संस्थान का यह कार्य सराहनीय है। कहा, अगर 1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम का इतिहास पढ़ा जाये तो कई माह लगेंगे, लेकिन चित्र प्रदर्शनी ने दस मिनट में आंदोलन के विभिन्न पहलुओं को उजागर कर दिया है।
संस्थान के प्रबंध निदेशक सूर्यकांत पांडेय ने प्रथम स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास को बताते हुए कहा कि 10 मई के दिन मेरठ की छावनी से अंग्रेजों के खिलाफ भारतीय सैनिकों ने विद्रोह का बिगुल बजाया था। शहीद भगत सिंह ने तो 10 मई को भारत का सबसे शुभ दिन बताया है।
उन्होंने चित्रों के संकलन में संस्थान के उपाध्यक्ष जमशेद अहमद की भूमिका को सराहा। संस्थान के अध्यक्ष सलाम जाफरी, जमशेद अहमद, जसवीर सिंह सेठी, विश्व प्रताप सिंह अंशू, अब्दुल रहमान भोलू, रमाशंकर गुप्त ने मंडलायुक्त का स्वागत किया। वन राज्य मंत्री तेज नारायण पाण्डेय पवन, जिलाध्यक्ष जयशंकर पांडेय, हाजी असद अहमद सहित बड़ी संख्या में लोग प्रदर्शनी देखने पहुंचे।