अयोध्या। रामनगरी अयोध्या न सिर्फ श्रीराम बल्कि बजरंगबली की उपासना का भी प्रधान केंद्र है। कहा भी जाता है कि जहां श्रीराम, वहीं हनुमान..। इसकी तस्दीक रामनगरी के सैकड़ों मंदिरों से भी होती है, जहां श्रीराम व माता सीता के साथ बजरंगबली की भी प्रतिष्ठापना अनिवार्य रूप से की गई है।
इसके अलावा बजरंगबली के कई ऐसे स्थान हैं, जो सिद्धपीठों में गिने जाते हैं, यहां आस्था भी उमड़ती है। साथ ही यह मान्यता है कि बजरंगबली के दर्शन के बिना अयोध्या की तीर्थयात्रा अधूरी मानी जाती है। दीपोत्सव में आ रहे पीएम नरेंद्र मोदी भी बजरंगबली के दरबार में माथा टेकेंगे।
23 अक्तूबर को हनुमान जयंती का पर्व पूरे उल्लास के साथ मनाया जाएगा। रामचरित मानस में लिखा है कि जब श्रीराम स्वधाम जाने लगे लगे तो अयोध्या की सुरक्षा का कार्यभार बजरंगबली को सौंप गए। उन्हें अयोध्यावासी राजा के रूप में पूजते हैं। कहा जाता है कि बजरंगबली आज भी अयोध्या की सुरक्षा करते हैं। इसी के चलते अयोध्या आने वाले श्रीराम की पूजा-अर्चना के साथ बजरंगबली के दरबार में शीश नवाना नहीं भूलते।
हनुमान जी की उपासना का प्रमुख केंद्र हनुमानगढ़ी माना जाता है। मान्यता है कि त्रेता में श्रीराम दुर्ग के आग्नेय कोण पर स्थित इसी स्थल पर हनुमान जी निवास करते थे और श्रीराम के स्वधाम गमन के बाद उन्होंने अयोध्या के लोगों की सेवा-संरक्षण का दायित्व संभाला। यहां युगों से हनुमान जी की उपासना की परंपरा प्रवाहमान है। नाका हनुमानगढ़ी भी त्रेतायुगीन माना जाता है।
महंत रामदास बताते हैं कि मान्यता है कि हनुमान जी संजीवनी बूटी से युक्त द्रोणागिरि पर्वत लेकर जब आकाश मार्ग से गुजर रहे थे, तब कुछ ही फासले पर स्थित नंदीग्राम में तपस्यारत भरत ने उन्हें राक्षस समझकर धरती पर गिरा दिया। हनुमान जी जहां गिरे थे, नाका हनुमानगढ़ी का विग्रह वहीं स्थापित है। हनुमान किला में विराजमान हनुमान की उपासना को भक्त उमड़ते हैं।
मंदिर के महंत भजनानंदी रामभजन दास बताते हैं कि हनुमान जी बड़े ही कृपालु हैं तुरंत दया करते हैं। हनुमत निवास भी बजरंगबली की उपासना का प्रमुख केंद्र है। इसी तरह हनुमत सदन, हनुमानबाग, रिकाबगंज हनुमानगढ़ी, हनुमत हरिरामसदन सहित कई ऐसे स्थान हैं जहां बजरंगबली के दर्शन-पूजन को आस्था उमड़ती है।
रामनगरी के विद्याकुंड स्थित वीर भगवान का मंदिर हजारों भक्तों की आस्था का केंद्र हैं। यहां के हनुमान जी को व्यास हनुमान के रूप में पूजा जाता है। मंदिर के व्यवस्थापक पंडित कौशल्यानंदन वर्धन बताते हैं कि रामचरित मानस में लिखा है कि अग्निकुंड व रूक्मिणी कुंड के बीच में एक स्थान भूमि उपवन था। जहां बजरंगबली भरत, शत्रुघ्न सहित अयोध्यावासियों केे श्रीरामकथा सुनाते थे।
मान्यता है कि यह मंदिर उसी भूमि उपवन में स्थापित है। इसकी स्थापना उनके बाबा पंडित हनुमान दत्त मिश्र व्यास ने की थी। उन्होंने रामजन्मभूमि में भी 43 साल तक रामभक्तों को कथा सुनाई थी।