फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

अयोध्या के बाद काशी व मथुरा की बारी : डॉ. सुब्रह्मण्यम स्वामी

विज्ञापन
विज्ञापन
अयोध्या। साधु-संत के मार्गदर्शन के बिना कोई भी विजय या आंदोलन संभव नहीं है। आप हमें धर्म का रास्ता दिखाते हैं। आपके नेतृत्व में अयोध्या में मंदिर निर्माण संभव होने की कगार पर है। हमें अयोध्या के बाद काशी व मथुरा को भी हर हाल में मुक्त कराना होगा। ये बातें भाजपा नेता व पूर्व केंद्रीय मंत्री डॉ. सुब्रह्मण्यम स्वामी ने रविवार को रामनगरी में संत-धर्माचार्यों के बीच कहीं।
विज्ञापन

डॉ. सुब्रह्मण्यम स्वामी रविवार को अपने जन्मदिन पर मानस भवन सभागार में श्रीराम जन्मभूमि न्यास के अध्यक्ष महंत नृत्यगोपाल की अध्यक्षता में विराट हिंदुस्तान संस्था द्वारा आयोजित अभिनंदन समारोह में हिंदुत्व व राममंदिर पर खूब गरजे। डॉ. सुब्रह्मण्यम स्वामी ने कहा कि राम मंदिर से देश के करोड़ों लोगों की आस्था जुड़ी है। इसको लेकर सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि आस्था पर सवाल नहीं हो सकता।
सेकुलर होने के बाद भी हमारे संविधान में आस्था का जिक्र किया गया है। हमारा संविधान अंग्रेजों ने नहीं वरन डॉ. राजेंद्र प्रसाद, सरदार पटेल व डॉ. आंबेडकर जैसे लोगों ने मिलकर बनाया था। सेकुलर होने के बाद भी हमारे संविधान में हिंदुओं से संबंधित कई बातें लिखी हैं। ऐसे में संविधान को सेकुलर कहना व इसका धर्म से रिश्ता नहीं है, ये कहना गलत होगा। ऐसे में तय है कि सुप्रीम कोर्ट का फैसला राम मंदिर के पक्ष में आएगा।
विज्ञापन

उन्होंने कहा कि भगवान श्रीराम हमारे राष्ट्रीय चिह्न हैं। उनके मंदिर की रक्षा करना हमारा कर्तव्य है। वहां पूर्व में मंदिर था, इसे हाईकोर्ट ने माना है, जिसे अब कोई चुनौती नहीं दे सकता। कहा कि सुप्रीम कोर्ट में बहस के लिए मुझे अंत में मौका मिला है, अक्तूबर में पूजा के अधिकार को लेकर बहस करूंगा। इसमें मेरी बहस भारत सरकार से होनी है, जिसमें सुन्नी वक्फ बोर्ड का कोई मतलब नहीं है।
ऐसे में सरकार हर हाल में मेरी बात मानेगी। इसके बाद नवंबर में सुप्रीम कोर्ट का फैसला आएगा, जिसमें तय है कि मंदिर के पक्ष में फैसला आएगा। नवंबर के बाद मंदिर निर्माण शुरू होगा और पूरा देश खुशियां मनाएगा। डॉ. सुब्रह्मण्यम स्वामी ने कहा कि हमारी इच्छा है कि भव्य मंदिर निर्माण का उद्घाटन संत समाज के अगुवा महंत नृत्यगोपाल दास जी करें।
उन्होंने कहा कि बाबर ने मस्जिद नहीं बनवाई थी, उसके सेनापति मीर बाकी ने मंदिर तोड़कर मस्जिद बनवाई थी और वो शिया मुसलमान था। शिया कहते हैं कि ये जमीन हमारी है, उन्होंने कोर्ट में कहा है कि ये जमीन हिंदुओं को दे दी जाए। ऐसे में ये विवाद हिंदु-मुसलमान का नहीं बल्कि अब शिया और सुन्नी का रह गया है।
भाजपा नेता डॉ. सुब्रह्मण्यम स्वामी ने कहा कि उन्होंने विहिप के पूर्व अध्यक्ष स्व. अशोक सिंघल के कहने पर रामजन्मभूमि पर मंदिर निर्माण का बीड़ा उठाया था। इसके लिए उन्होंने पूजा के अधिकार को लेकर सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है।
कहा कि कोर्ट ने पहले भी माना है कि जहां भगवान की मूर्ति की प्राण प्रतिष्ठा हुई हो वो मंदिर है। रामलला की प्राण प्रतिष्ठा हुई थी, वो ही इसके मालिक हैं। मस्जिद टूटने के बाद भी वहां भगवान की पूजा-अर्चना हो रही है। ऐसे में तय है कि फैसला मंदिर निर्माण के पक्ष में ही आएगा।
स्वामी ने कहा कि एक दरवाजे से नहीं तो दूसरे दरवाजे से मंदिर निर्माण होगा। गर्भगृह की 2.77 एकड़ जमीन को छोड़कर शेष अधिगृहीत 67.4 एकड़ जमीन पर कोई विवाद नहीं है। सरकार चाहेगी तो इस पर मंदिर निर्माण की अनुमति दे सकती है। कानून के हिसाब से जमीन विवाद में सरकार राष्ट्रीय हित में कोई भी कदम उठा सकती है। पूर्व में कांग्रेस की नरसिम्हा राव सरकार ने लिखित रूप से कहा था कि ये तय हो जाए कि वहां पूर्व में मंदिर ही था तो ये जमीन हिंदुओं को दे दी जाए। कहा कि अगर कोर्ट के फैसले से नहीं तो सरकार की पहल पर मंदिर निर्माण होगा। भाजपा सरकार में ऐसा होने में आसानी होगी।
डॉ. सुब्रह्मण्यम स्वामी ने कहा कि आज हम दोबारा विश्व गुरु बनने की ओर बढ़ रहे हैं। पूरे विश्व में हमारा मान बढ़ रहा है। जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाकर भाजपा सरकार ने दृढ़ मानसिकता का परिचय दिया है। अब पीओके को भारत में मिलाने की तैयारी है। कहा कि पाकिस्तान ज्यादा बोलेगा तो भारत उसके चार टुकड़े कर देगा। उन्होंने कहा कि देश के करीब चार लाख मंदिर सरकार के नियंत्रण में हैं, इसे हम छुड़वा सकते हैं लेकिन इनकी देखभाल की जिम्मेदारी कौन लेगा। उन्होंने साधु-संतों से आह्वान किया कि वो इसके लिए आगे आएं।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें