अयोध्या। रामजन्मोत्सव के उल्लास में अयोध्या लीन हो चुकी है। तुलसीदास ने रामचरित मानस में लिखा है कि जेहि दिन राम जनम श्रुति गावहिं, तीरथ सकल तहां चलि आवहिं...।
यह पंक्तियां रामजन्मोत्सव के अवसर पर साकार होती दिख रही हैं। रामजन्मोत्सव पर बिखर रही अयोध्या की अलौकिक आभा से मानो यह प्रतीत हो रहा है कि समस्त तीर्थ अयोध्या में ही उतर आए हैं।
शाम होते ही अयोध्या जगमग हो उठती है, सड़कों पर जय श्रीराम का उद्घोष, मंदिरों में गूंजते बधाई गीत उत्सव कर चरम परिलक्षित कर रहे हैं। रामजन्मोत्सव की शुभ घड़ी आने में अब 24 घंटे से भी कम का समय बचा है।
नवमी तिथि मधुमास पुनीता, शुक्ल पक्ष अभिजीत हरप्रीता...नवमी तिथि के शुक्ल पक्ष के अभिजीत मुहूर्त में रामलला का जन्म हुआ था। इस बार यह शुभ मुहूर्त 10 अप्रैल को पड़ रहा है। ऐसे में जन्मोत्सव का मुख्य पर्व इसी दिन मनाया जाएगा।
जन्मोत्सव की घड़ी नजदीक आते ही पूरी अयोध्या राममय हो चुकी है। श्रद्धालुओं का हुजूम उमड़ पड़ा है। मठ-मंदिरों से लेकर सरयू तट की भव्य सजावट की गई है।
रामजन्मभूमि में भी जिस तरह तैयारियां चल रही हैं, उसको देखकर इस बार की भव्यता का अंदाजा सहज ही लगाया जा सकता है। मेलाक्षेत्र में एलईडी के जरिए सुबह-शाम रामायण धारावाहिक का प्रसारण पूरे माहौल को भक्तिमय कर रहा है।
पहली बार रामजन्मोत्सव में दर्जनों स्थानों पर सजी सांस्कृतिक संध्या में राम की स्तुति गाई जा रही है। ऐसा माहौल है कि अयोध्या में प्रवेश करते ही भक्तों को राममय वातावरण की अनुभूति हो रही है।
प्रशासन द्वारा भक्तों की सुरक्षा से लेकर उन्हें बेहतर व्यवस्थाएं देने का भी पूरा इंतजाम किया गया है। कुल मिलाकर अयोध्या उत्सव में लीन है, भक्त अपने आराध्य के जन्मोत्सव का गवाह बनने के लिए बेसब्र हैं।
मेलार्थियों की सुविधा के लिए प्रशासन द्वारा स्वास्थ्य कैंप, मे आई हेल्प यू कैंप आदि की व्यवस्था की गई है। तुलसी उद्यान में लगे मे आई हेल्प यू कैंप में श्रद्धालु विभिन्न सुविधाओं के लिए जानकारी लेते दिखे।
यहां श्रद्धालु के लापता परिजनों को भी मिलवाया जा रहा है। स्वास्थ्य कैंप में मरीजों के लिए बेहतर व्यवस्थाएं हैं। दवा से लेकर इलाज की व्यवस्था की गई है, चिकित्सकों की टीम लगाई है।
रामजन्मोत्सव मेले में राममय अयोध्या भक्तों को आकर्षित कर रही है। मठ-मंदिरों में श्रद्धालु उमड़ रहे हैं। भीषण गर्मी व तेज धूप भी भक्तों की आस्था के आगे बौनी साबित होती दिखती है।
रामलला, हनुमानगढ़ी व कनकभवन मंदिर भक्तों की श्रद्धा का केंद्र है। मठ-मंदिरों को भव्यता पूर्वक सजाया गया है। रामलला के दरबार में प्रतिदिन 20 हजार भक्त दर्शन को पहुंच रहे हैं। श्रद्धालु जन्मोत्सव में लीन हैं।
रामनगरी की सफाई व्यवस्था के लिए बड़ी-बड़ी मशीनों के साथ ही करीब एक हजार सफाईकर्मी लगाए गए हैं। स्वास्थ्य विभाग की ओर से वंशिका एचआर सर्विस प्राइवेट लिमिटेड को टेंडर दिया गया है। कंपनी के मैनेजर पुष्कर सिंह ने बताया कि मेलाक्षेत्र में उनकी कंपनी की ओर से 425 सफाई मित्र उतारे गए हैं। मेला क्षेत्र सहित प्रमुख मठ-मंदिरों की सफाई के लिए अलग-अलग टीमें लगाई गई हैं।
रामनगरी में शुक्रवार को श्रद्धालुओं की संख्या में भारी इजाफा हो गया है। मुख्य पर्व रामजन्मोत्सव 10 अप्रैल को मनाया जाएगा, उससे पहले अयोध्या में श्रद्धालुओं का हुजूम उमड़ पड़ा है। सप्तमी तिथि शुक्रवार को अयोध्या में करीब पांच लाख श्रद्धालु पहुंच चुके हैं। रामजन्मोत्सव पर यह संख्या चार गुना हो जाएगी। सड़कों पर जय श्रीराम का जयघोष गूंज रहा है, अयोध्या में उल्लास छाया हुआ है।
रामनगरी के सरयू तट की भव्यता रामजन्मोत्सव में देखते ही बन रही है। तुलसी उद्यान से लेकर सरयू तट व राम की पैड़ी शाम होते ही भव्य सजावट व रोशनी से जगमगा उठती है। सरयू तट की आभा भक्तों को आकर्षित कर रही है। भजन संध्या स्थल में सजे सांस्कृतिक मंच पर सांस्कृतिक कलाकारों की प्रस्तुति भक्तों को बांध रही है। कई अन्य स्थानों पर सांस्कृतिक मंच सजे हैं।
राम की पैड़ी का अविरल जल प्रवाह भी श्रद्धालुओं को आनंदित कर रहा है। राम की पैड़ी की सफाई के बाद अविरल जल प्रवाह 02 अप्रैल से ही शुरू कर दिया गया है। मेले में आने वाले श्रद्धालु पैड़ी के अविरल जल प्रवाह में स्नान कर आनंदित हो रहे हैं। यहां स्नान के दौरान खतरा भी कम रहता है। इसलिए श्रद्धालु राम की पैड़ी में प्रवाहित हो रही सरयू की धारा में स्नान करने को लेकर उत्सुक दिखते हैं।
रामजन्मोत्सव का चरम तो रामनगरी के मठ-मंदिरों में दिख रहा है। सुबह अनुष्ठान, पूजा-अर्चना के बाद शाम होते ही मंदिरों में बधाई गान की महफिल सज जाती है। शाम होते ही पूरी अयोध्या में बधाई गान गूंजने लगता है। कहीं रामजन्म की स्तुति तो कहीं जन्म की बधाइयां गाईं जा रही है। भक्त आह्लादित होकर गीत-संगीत व नृत्य की त्रिवेणी में डुबकी लगाते दिखते हैं। यह सिलसिला देर रात्रि तक जारी रहता है।
रामनगरी में मेलार्थियों की भीड़ बढ़ने के साथ ही सुरक्षा घेरा भी सख्त कर दिया गया है। मेले में तीन दिनों तक रूट डायवर्जन लागू करते हुए वाहनों का प्रवेश प्रतिबंधित कर दिया गया है। एटीएस की टीम के साथ-साथ आरएएफ, सीआरपीएफ सहित सिविल पुलिस के जवान मुस्तैद दिख रहे हैं। जगह-जगह बैरिकेडिंग कर सुरक्षा कड़ी कर दी गई है। अर्द्धसैनिक बल के जवान सड़कों पर भ्रमणशील हैं।