अयोध्या। श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट पर जमीन खरीद में लगे घोटाले का आरोप रामनगरी में चर्चा का विषय बना हुआ है। हालांकि रामनगरी के वाशिंदों व संत-धर्माचार्यों ने ट्रस्ट पर विश्वास जताया है।
लोगों का कहना है कि ट्रस्ट ने जो किया है वह ठीक है। आज रामनगरी की संपन्नता बढ़ गयी है। अब अयोध्या पहले जैसी नहीं रही, यदि अयोध्या की संपन्नता देखनी हो तो, यहां जमीन खरीद कर देखें।
जो जमीन कौड़ियों के भाव थी, आज उसकी कीमत करोड़ों में हो गई है। इसलिए ट्रस्ट को दो करोड़ की जमीन को नौ गुना दाम में खरीदना पड़ा। मणिरामदास की छावनी के उत्तराधिकारी महंत कमलनयन दास ने कहा कि ट्रस्ट ने कुछ भी गलत नहीं किया है।
पूरी पारदर्शिता से डील की गई है। अब चूंकि राममंदिर निर्माण का काम तेजी से बढ़ रहा है, इसलिए मंदिर विरोधियों को रास नहीं आ रहा। वह नई अड़चन पैदा करने की कोशिश कर रहे हैं।
तिवारी मंदिर के महंत गिरीशपति त्रिपाठी ने कहा कि राममंदिर का फैसला आने के बाद अयोध्या की संपन्नता बढ़ गई है। जिन्हें अयोध्या की संपन्नता देखनी है वह यहां जमीन खरीद कर देखें। कौड़ियों के भाव जो जमीन थी वह आज करोड़ों की हो गई है।
इसलिए ट्रस्ट ने नौ गुना महंगी जमीन खरीदी है। आरोप लगाने वालों को वैष्णो देवी के आसपास कटरा से लेकर जम्मू तक से लेकर तिरुपति हो या काशी-मथुरा आदि स्थानों पर जब यहां के संत या देश के कारोबारी जमीन खरीदने जाते हैं तो पता चलता है वहां कितनी महंगी जमीन है।
अब अयोध्या भी इसी तरह की संपन्नता में शामिल हो गया है। संत समाज को ट्रस्ट की पारदर्शिता पर कोई शंका नहीं है। रामभक्त मंदिर निर्माण में रोड़ा डालने वालों को कतई माफ नहीं करेंगे।
महंत भरत दास भी ट्रस्ट पर लगे घोटाले के आरोप को साजिश बताते हैं। कहते हैं कि राममंदिर निर्माण, राष्ट्रमंदिर निर्माण का यज्ञ है। इतिहास गवा है कि ऐसे यज्ञ में राक्षस विघ्न डाला ही करते हैं।
राजनेता रूपी राक्षसों का राममंदिर निर्माण में विघ्न डालने का प्रयास कतई सफल नहीं हो पाएगा। चिकित्सक डॉ. आनंद उपाध्याय कहते हैं कि यह सही है कि अयोध्या की तस्वीर अब बदल चुकी है।
राममंदिर निर्माण शुरू होने के साथ ही जमीन के भाव आसमान में पहुंच गए हैं। ऐसे में 10 साल में दो करोड़ की जमीन की कीमत 18 करोड़ हो जाना बड़ी बात नहीं है। फिर ट्रस्ट ने फैक्ट प्रस्तुत कर दिया है, इसलिए इसे सिर्फ एक साजिश ही कहा जाएगा।
ट्रस्ट पर लगे घोटाले के आरोप पर पूर्व मुस्लिम पक्षकार इकबाल अंसारी ने अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि हमें ट्रस्ट की ईमानदारी पर कोई शक नही है। ट्रस्ट जो कर रहा है वह अच्छे ढंग से कर रहा है।
ट्रस्ट ने जो जमीन ली है वह वर्तमान रेट के अनुसार ली है। स्टांप चोरी की भी बात सामने नहीं आ रही है। इसलिए ट्रस्ट पर सवाल खड़ा करना उचित नहीं है। हालांकि चूंकि रामकाज हो रहा है इसलिए 18 करोड़ के बजाय जमीन और कम पैसे में ट्रस्ट को देनी चाहिए थी।
बार एसोसिएशन फैजाबाद के वरिष्ठ अधिवक्ता गणेश पांडेेय ने कहा कि 2011 का जो एग्रीमेंट था। उसी अनुसार उन्हें दो करोड़ का भुगतान किया गया है। साथ ही विक्रेता ने 10 साल बाद नई दर पर एग्रीमेंट किया है, जो कि मार्केट वैल्यू से कम भी बताई जा रही है।
साथ ही 2021 के अनुसार ही स्टांप शुल्क दिया गया है। इसलिए इसमें कोई स्टांप चोरी नहीं हुई है, फिर पैसे का लेनदेन भी आरटीजीएस प्रणाली से हुआ है। इसमें भी कहीं भी कई बेईमानी की जगह नहीं बचती है, इसलिए डील को लेकर घोटाले का आरोप गलत है।
जमीनी मामलों के जानकार विकास श्रीवास्तव कहते हैं कि राममंदिर के हक में फैसला आते ही अयोध्या में जमीनों के दाम तेजी से बढ़ गए हैं। अभी जिले में 20 लाख से 50 लाख बिस्वा तक जमीन बिक रही है।
उत्तर प्रदेश सरकार भी कई योजनाओं के लिए जमीन खरीद रही है, अधिग्रहण कर रही है। बड़े कारोबारी अयोध्या में होटल, मॉल और मार्केट खोलने के लिए जमीन ले रहे हैं।
कई तरह की इंडस्ट्री भी लगने वाली है। इससे भी जमीनों के दाम में उछाल आया है। ऐसे में 10 साल में किसी जमीन की कीमत दो करोड़ से 18 करोड़ हो जाना लाजिमी है।