अब तक के मिले आंकड़ों से अनुमान लगाया जा रहा है कि इस बार अति कुपोषित बच्चों की संख्या पहले से अधिक होगी। अभियान की हकीकत परखने के लिए ‘अमर उजाला टीम’ ने कुछ केंद्रों का जायजा लिया।
वजन दिवस अभियान के तहत जिले में द्वितीय चरण में एक हजार 154 आंगनबाड़ी केंद्रों पर बच्चों का वजन किया गया। सभी केंद्रों पर छोटे व बड़े बच्चों को तौलने के लिए मशीन उपलब्ध थी।
केंद्रों पर वजन कराने के लिए अभिभावक भी बच्चों को लेकर आ रहे थे। जबकि आंगनबाड़ी कार्यकर्त्रियां भी घर-घर जाकर बच्चों को वजन कराने के लिए बुलाकर ला रही थीं।
अभियान का निरीक्षण करने के लिए कमिश्नर सूर्य प्रकाश मिश्र ने मसौधा ब्लॉक क्षेत्र के पौरा और दसौली गांव के केंद्रों का निरीक्षण किया। पोरा गांव के लगभग साढ़े छह से सात फीसदी बच्चे अति कुपोषित श्रेणी में बताए गए हैं।
ये गांव कुपोषण के मद्देनजर कमिश्नर ने गोद ले रखा है। सीडीओ ने मुमताजनगर, रहीमपुर बदौली और शेखपुर जाफर के वजन केंद्रों का निरीक्षण किया।
झारखंडी मोहल्ले में अपने बच्चे का वजन कराने आए जयनारायण ने बताया कि वह ये जानना चाहते हैं कि उनका बच्चा स्वस्थ है या नहीं। केंद्रों पर बच्चों की तौल के साथ-साथ उन्हें स्वस्थ रहने के बारे में सलाह दी जा रही थी।
बल्ला हाता की आंगनबाड़ी कार्यकर्त्री माला ने बताया कि अभी वजन करके कुपोषित व अति कुपोषित बच्चों को चिह्नित किया जा रहा है। सभी बच्चों का रिकार्ड जिला कार्यक्रम अधिकारी को दिया जाएगा।
इसके बाद कुपोषित व अति कुपोषित बच्चों की सेहत सुधारने के लिए कदम उठाए जाएंगे। जिला महिला अस्पताल के बालरोग विशेषज्ञ डॉ. विकास अग्रवाल ने बताया कि जागरूकता के अभाव में बच्चे बीमार हो रहे हैं।
छह माह तक बच्चों को सिर्फ मां का दूध पिलाया जाए। इसके बाद बच्चों को हल्का व सुपाच्य भोजन दिया जाए। बच्चों को खाना खिलाने से पहले और बाद में अच्छी तरह से हाथ जरूर धोएं।
इसके बाद भी यदि बच्चे की तबियत खराब हो, तो नजदीकी अस्पताल ले जाकर इलाज कराएं। कंट्रोल रूम से दी गई जानकारी के मुताबिक लक्ष्य 1,35,532 के सापेक्ष लगभग एक लाख 16 हजार बच्चों का वजन कराया गया है।
सीडीओ ने बताया कि अब तक मिली रिपोर्ट के मुताबिक लक्ष्य के 86 फीसदी बच्चों का वजन हो गया है। ये अंतिम रिपोर्ट नहीं है। उन्होंने बताया कि पिछले अभियान से ये बेहतर रहा।