अयोध्या। लखनऊ में अंतरराष्ट्रीय रामायण महोत्सव में शिरकत करने पहुंचे विदेशी कलाकारों ने रामनगरी पहुंचकर रामलला के दरबार में हाजिरी लगाई और सरयू स्नान कर विभिन्न मंदिरों में दर्शन-पूजन किया।
अपने पुरखों की आस्था भूमि की रज लेकर सुदूर बसे भारतीय मूल के लोग निहाल दिखे। अयोध्या पहुंचने पर अयोध्या शोध संस्थान के निदेशक वाईपी सिंह ने रामलीला कलाकारों का स्वागत किया।
रामायण महोत्सव में शामिल होकर रविवार की सुबह मॉरीशस एवं त्रिनिडाड के 25 कलाकारों ने अयोध्या पहुंचकर सरयू स्नान किया और विभिन्न मंदिरों में दर्शन-पूजन कर अपनी आस्था निवेदित की।
रामलीला कलाकारों के दल ने सर्वप्रथम पावन सलिला सरयू में डुबकी लगाई। स्नान, पूजन के बाद कलाकारों का दल रामलला के दरबार में पहुंचा।
रामलला के दरबार में हाजिरी लगाने के बाद दल ने हनुमानगढ़ी व कनकभवन के दरबार में भी माथा टेका। तुलसी स्मारक भवन जाकर राम व रामायण से संबंधित ऐतिहासिक धरोहरों को देखा। मॉरीशस के कलाकार दर्शन रंजीव ने कहा कि वह पहली बार अयोध्या आए हैं, रामलला की दशा देखकर मन द्रवित हुआ।
गोपी सुरेश बोले कि अयोध्या में तो बस राममंदिर की कमी अखरती है, यहां जल्द ही राममंदिर बनना चाहिए। कमल कूमर ने कहा कि यह हमारे पुरखों की जन्मभूमि है, यहां के रज हमारे लिए अटूट श्रद्धा की वस्तु है, रामनगरी का दर्शन कर जीवन धन्य हुआ।
त्रिनिडाड के आर्यन विकराम ने कहा कि रामलला की भूमि पर यदि राममंदिर नहीं बनेगा तो फिर कहां बनेगा। विष्णु सरजदीन बोले अयोध्या की धरती पर आकर जो आध्यात्मिक ऊर्जा प्राप्त होने का अहसास हुआ वह बयां नहीं किया जा सकता, बस जल्द ही राममंदिर बन जाए। अयोध्या शोध संस्थान के प्रशासनिक अधिकारी रामतीरथ ने बताया कि टीम दर्शन-पूजन के बाद वापस लखनऊ के लिए रवाना हुई।