इंसपेक्टर राज की आहट। एक कारोबार के लिए दर्जन भर से ज्यादा कार्यालयों की परिक्रमा। प्रतिकूल व्यापारिक माहौल। पार्किंग का इंतजाम नहीं। लॉ एंड आर्डर की प्रॉब्लम। पुरानी कमिश्नरी, फिर भी एक सिनेमा हॉल नहीं। बिजली की किल्लत। व्यापार करना आसान नहीं। पहाड़ जैसी चुनौतियां, फिर भी व्यापारी भविष्य के प्रति आशान्वित हैं। उम्मीद है कि एक दिन अयोध्या की जैसी विश्व पटल पर ख्याति है, वैसा ही विकास होगा। सुनियोजित स्मार्ट सिटी से जुड़वा शहर पर्यटकों का केंद्र बनेंगे।
यह तड़प अमर उजाला फोकस ग्रुप में संवाद के दौरान रविवार को सआदतगंज बाईपास स्थित एक कांफ्रेंस हॉल में शहर के व्यापारियों-कारोबारियों में दिखी। वे सबकी तरक्की के लिए विकास और कानून-व्यवस्था को ही कुंजी मानते हैं।
कहते हैं कि ऐसे जनप्रतिनिधि के चयन को महत्व देने जरूरत है जो समस्याओं को संवेदनशीलता से महसूस करे, उसे निदान से संबंधित जगहों पर प्रमुखता से उठाए। उनका कहना है कि हम सजग हुए तो सूरत जरूर बदलेगी।
जनप्रतिनिधियों की बड़ी सैलरी पर तंज कसते हुए एक व्यापारी ने कहा कि इतना भारी वेतन लेते हैं, सुविधाएं लेते हैं लेकिन उसी अनुपात में सेवा तो करें। नवाबों की राजधानी रही फैजाबाद और धर्मनगरी अयोध्या के पयर्टन के मानचित्र में स्थान नहीं बना पाने का लोगों में मलाल है।
दूसरे धार्मिक नगरों का तुलना करते हुए कहा कि पयर्टन के नजरिए से सुनियोजित स्मार्ट सिटी जैसा विकास होगा तभी यहां की सूरत बदलेगी। धार्मिक नगरियों की आर्थिक हालत मूलत: पयर्टकों की आवाजाही पर ही टिकी होती है। पयर्टकों को सुविधाएं मिलेंगी तो वे देश-विदेश से आएंगे और यहां पर स्थानीय स्तर पर रोजगार तो बढ़ेगा ही, व्यापार में भी बढ़ोतरी होगी।
शहर में पार्किंग स्थल नहीं होने का भी व्यापारियों में दर्द सता रहा है। कई वर्ष से उद्योग बंधु की बैठकों में यह मुद्दा नियमित तौर पर उठाने के बाद भी इस ओर प्रशासन ने ध्यान नहीं दिया जिसको लेकर वक्ताओं में आक्रोश दिखा। कर व्यवस्था के सरलीकृत बनाए जाने की मांग जोर-शोर से की गई।
एक व्यापारी ने कहा कि अन्य देशों की तरह यहां भी जीएसटी के अलावा अन्य कोई टैक्स न लगे। मंडल स्तर पर बेहतर चिकित्सीय सुविधाओं का अभाव व्यापारियों में खटक रहा है। एक व्यवसायी ने कहा कि कोई रोग हो जाए तो उसके लिए लखनऊ भागना पड़ता है। फैजाबाद और अयोध्या के सर्वांगीण विकास के लिए शीघ्र नगर निगम घोषित किए जाने की आवाज बुलंद हुई।
डाभासेमर स्थित डॉ. भीमराव अंबेडकर क्रीड़ा संस्थान में मानक के अनुरूप सुविधाओं को दिए जाने की मांग उठी। इसके साथ ही शिवनगर आदि जैसे मोहल्लों में जल निकासी का मुकम्मल व्यवस्था नहीं होने से बरसात में टापू जैसी स्थिति को भी उठाया गया।
बिजली की किल्लत भी प्रमुख समस्या के रूप में उभर कर सामने आई। औद्योगिक माहौल के लिए 24 घंटे बिजली देने की मांग उठी। जनप्रतिनिधि ऐसा हो जिसके सक्रियता से व्यापारिक माहौल अच्छा बना रहे। घूस पर लगाम लगाए, इंसपेक्टर राज के आतंक से मुक्ति दिलाए तथा आधी रात को भी फोन होने पर वह बात करे तथा समस्या के निदान के प्रति सक्रिय हो जाए।