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अमेरिकन केसर पैदा करने वाले किसान परेशान, नहीं हो पा रही बिक्री

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बीकापुर। वैश्विक महामारी के चलते अमेरिकन केसर की फसल उगाने वाले किसानों की दुश्वारियां बढ़ गईं हैं। करीब पांच माह पूर्व मार्च महीने में केसर की फसल तैयार होने के बाद उनके फूलों को चुनकर छांव में सुखाने के बाद बिक्री के लिए किसान घर में रख रखा है। लेकिन बिक्री नहीं हो पा रही है।
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बीकापुर ब्लॉक क्षेत्र के बलरामपुर निवासी केसर किसान रामसूरत यादव ने बताया कि उन्होंने एक बीघा खेत में केसर की फसल लगाई थी। मार्च में पांच किलो ग्राम अमेरिकन केसर की फसल से फूल तैयार करके बिक्री के लिए रखा है लेकिन बिक्री नहीं हो पा रही है। जबकि पिछले वर्ष बिक्री हो गई थी।
इसी प्रकार अमेरिकन केसर की फसल उगाने वाले खेमा सराय निवासी रज्जू निषाद, गिरधारी लाल, रजौरा निवासी रामेश्वर प्रसाद, बीकापुर नगर पंचायत के भगवती नगर निवासी सुरेश उर्फ रज्जन चौबे, बीकापुर नगर पंचायत के निवासी मजीद, राम उजागर वर्मा, बनवारी सहित कई किसानों ने बताया कि नगदी फसल के तौर पर तैयार की गई अमेरिकन केसर की फसल इस बार घाटे का सौदा साबित हो रही है। कोरोना संकट के कारण तैयार फसल की बिक्री नहीं हो पा रही है।
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यदि बिक्री नहीं हुई तो केसर खराब हो जाएगी। किसानों ने बताया कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में अमेरिकन केसर की कीमत 60 हजार रुपये से 70 हजार रुपये प्रति किलो होती है। इसकी बिक्री ऑनलाइन कानपुर, जयपुर, जोधपुर और मुंबई से की जाती है। फसल तैयार होने के बाद ग्राहक भी संपर्क करते हैं। लेकिन इस बार खरीदार नहीं मिले हैं, जिससे लाखों रुपये का नुकसान हो रहा है।
किसानों का कहना है कि शासन को केसर की फसल उगाने वाले किसानों को प्रोत्साहित किए जाने के साथ फसल की बिक्री किए जाने की व्यवस्था करना चाहिए, जिससे नगदी तौर के रूप में अमेरिकन केसर की फसल उगा कर किसान अपने आर्थिक स्थिति मजबूत कर सके। आर्थिक दृष्टिकोण से केसर की फसल किसानों के लिए उनका जीवन स्तर सुधारने और आर्थिक मजबूती का सबब बन सकता है।
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