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अयोध्या में खुलेगा ड्राइविंग ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट

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अयोध्या। अब ड्राइविंग लाइसेंस बनवाने या फिर फिटनेस टेस्ट के लिए आरटीओ दफ्तर के चक्कर लगाने के साथ ही दलालों के चंगुल से मुक्ति मिल जाएगी।
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कंप्यूटर व्यक्ति का ड्राइविंग टेस्ट लेगा और सिस्टम में रिपोर्ट फीड कर देगा। उसके बाद ही ड्राइविंग लाइसेंस या फिटनेस सर्टिफिकेट जारी हो सकेगा। इसके लिए आईटीआई परिसर में 5.24 करोड़ की लागत से ड्राइविंग ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट की स्थापना की जा रही है। जुलाई तक काम पूरा होने के उपरांत शीघ्रता से इसे चालू किया जाएगा।
अब तक लाइसेंस बनवाने की जो प्रक्रिया अपनाई जा रही है, इसके तहत तमाम अयोग्य व्यक्तियों को ड्राइविंग लाइसेंस जारी कर दिया जा रहा है।
रोज ऐसे तमाम लोगों को लाइसेंस जारी हो रहे हैं, जिनकी ड्राइविंग बेहद खराब है। मौजूदा समय में ऑनलाइन आवेदन के उपरांत कागजातों का सत्यापन कराने के बाद कंप्यूटर टेस्ट में सेटिंग करके लोग पास हो जाते हैं।
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यातायात नियमों की जानकारी न होने से ऐसे व्यक्ति नियमों का पालन 20-30 प्रतिशत ही कर पाते हैं। सड़क दुर्घटना पर अंकुश लगाने के लिए अब सरकार की ओर से नई पहल की जा रही है।
अब डीएल के लिए टेस्ट की ऑटोमेटिक व्यवस्था कराई जाएगी। इसके लिए 5.24 करोड़ की लागत से आईटीआई परिसर में तीन एकड़ भूमि पर ड्राइविंग ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट की स्थापना की जा रही है।
शासन की ओर से प्रस्ताव स्वीकृत होने के बाद राजकीय निर्माण निगम को काम की जिम्मेदारी दी गई है। प्रथम किश्त के रूप में करीब एक करोड़ रुपये जारी कर कार्य शुरू कर दिया गया है। मौजूदा समय में चहारदीवारी का निर्माण कराया जा रहा है। इसके उपरांत एकेडमिक ब्लॉक, ट्रेनिंग रूट, प्रशासनिक ब्लॉक का निर्माण शुरू कराया जाएगा।
ऑटोमेटेड होगा ट्रैक, लगेंगे सेंसर
ड्राइविंग टेस्ट के लिए जो ट्रैक बनाया जाएगा, वह पूर्णतया ऑटोमेडेट होगा। इसमें ऐसे ऑटोमेटिक सेंसर लगेंगे, जो कि ड्राइविंग टेस्ट के दौरान आवेदक का रिजल्ट बनाएंगे।
इस ट्रैक पर विभिन्न प्रकार के ट्रैफिक सिग्नलों के अलावा अंडरपास, फ्लाईओवर, एलिवेटेड, पहाड़ी एरिया व अन्य प्रकार की चैलेजिंग ड्राइविंग का टेस्ट लिया जाएगा। इसी उद्देश्य से निर्माण कार्य कराया जा रहा है।
साथ ही डिजिटल सिस्टम, अत्याधुनिक कैमरा व मशीन को माध्यम बनाया जाएगा। सिस्टम कुछ मिनट में जांच रिपोर्ट स्वत: मुख्य सर्वर को भेज देगा। इसमें परिवहन विभाग के कर्मचारी या अधिकारी किसी तरह के हस्तक्षेप नहीं कर पाएंगे। मानक को पूरा करने वालों का स्वत: डीएल तैयार हो जाएगा और एसएमएस से सूचना दी जाएगी।
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इस व्यवस्था के लागू होने से पात्र व्यक्ति को ही लाइसेंस जारी किया जाएगा, इससे सड़क दुर्घटना में कमी आएगी। साथ ही आरटीओ दफ्तर के कर्मचारियों का दखल भी समाप्त हो जाएगा। जुलाई तक निर्माण पूरा होने के बाद शीघ्रता से इसे संचालित किया जाएगा।
नंद कुमार, एआरटीओ, प्रशासन, अयोध्या
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