मौसम विभाग ने कम बारिश की घोषणा पहले ही की थी। लेकिन अब स्थिति कम के बजाए फिलहाल तो न के बराबर ही दिख रही हैं। ऐेसे में सूखे के आसार बन रहे हैं।
प्रशासन ने सूखे से निपटने के लिए कार्ययोजना पहले ही बना ली है। इसमें सिंचाई से लेकर वैकल्पिक खेती की योजना तक शामिल हैं। लेकिन अभी तैयार कार्ययोजना पर अमल होने का इंतजार है।
अगस्त का दूसरा सप्ताह चल रहा है। अब तक औसत बारिश भी नहीं हुई है। इस पखवारा बारिश लगभग शून्य रही है। किसानों का कहना है कि अगले पखवारे भी बारिश न हुई गर्मी और धूप का यही हाल रहा तो खेती चौपट हो जाएगी।
सूखे से निपटने की कार्य योजना तो जून में तैयार कर ली गई थी। प्रशासन से बनाई गई सूखे की कार्ययोजना पर अभी कार्रवाई जमीन पर नहीं दिखाई पड़ रही है।
दावे चाहे कुछ भी लेकिन माइनरों में टेल तक पानी नहीं आ रहा है तो बिजली आपूर्ति की दशा सबसे ज्यादा खराब है। जिलों को सूखाग्रस्त घोषित करने की बाबत व्यवस्था यह है कि 50 फीसदी फसलों की क्षति पर जिले के सूखाग्रस्त घोषित किया जाता है।
प्रशासन के मुताबिक अब तक शासन से इस बाबत कोई निर्देश प्राप्त नहीं हुआ है। न ही कोई सर्वे कराया गया है। जिला प्रशासन ने सूखे से निपटने को जो कार्ययोजना तैयार की है उसमें पशुओं के पानी से चारे तक की व्यवस्था, पेयजल के लिए हैंडपंप की व्यवस्था के साथ ही सिंचाई के लिए सरकारी व गैर सरकारी नलकूपों के साथ ही नहरों और माइनरों में पानी की व्यवस्था समाहित है।
सिंचाई के लिए सभी 683 नलकूपों को संचालित होने की स्थिति में रखे जाने, सभी छह दर्जन से ज्यादा माइनरों की टेल तक पानी पहुंचाने की व्यवस्था बनाए रखने का बात कही गई। लेकिन न तो माइनरों की टेल तक पानी पहुंच रहा है और न ही नलकूप संचालित हो पा रहे हैं।
एडीएम वित्त एवं राजस्वजय शंकर त्रिपाठी कहते हैं कि अभी सूखे की स्थिति को लेकर स्थानीय कोई सर्वे की कार्रवाई नहीं की गई है। संबंधित सभी विभागों को कार्ययोजना के मुताबिक कार्रवाई के लिए निर्देश दिया गया है। शासन से निर्देश के मुताबिक कार्रवाई की जाएगी।