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सीजेरियन प्रसव बाद वार्डों में राउंड नहीं लेते चिकित्सक

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अयोध्या। जिला महिला अस्पताल में प्रसव के लिए भर्ती होने वाली महिलाएं सीजेरियन बाद भगवान भरोसे रहती है। यह तीन मामले तो इसकी बानगी भर है। वार्ड में शिफ्ट होते ही मरीजों की देखभाल व इलाज का जिम्मा डाक्टरों की बजाय नर्सों के जिम्मे आ जाता है।
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शनिवार को अमर उजाला टीम ने अस्पताल के वार्डों का जायजा लिया तो सामने आया कि महिला अस्पताल में सामान्य प्रसव तक तो स्थिति ठीक है लेकिन सीजेरियन प्रसव किसी जोखिम से कम नहीं होता। ओटी में मरीजों का ब्लड प्रेशर, थायराइड, मधुमेह सहित अन्य बीमारियां होने की स्थिति में आपरेशन संभव नहीं हो पाता।
सामान्य मरीजों का ऑपरेशन होने के बाद उन्हें वार्डों में शिफ्ट करने के बाद चिकित्सक वार्ड में उनका कोई हाल चाल लेने नहीं पहुंचते जब तक स्थिति गंभीर न हो जो जाए। प्रसव सर्जरी बाद वार्ड में भर्ती महिला का इलाज पूरी तरह तैनात नर्सों के जिम्मे रहता है।
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जिले की आधी आबादी के प्रसव से जुड़े मामलों के लिए जिला मुख्यालय पर महिला अस्पताल व मेडिकल कॉलेज संचालित है। मेडिकल कॉलेज में अभी तक इमरजेंसी सेवाएं सुचारु न हो पाने के कारण अधिकांश मामले या तो महिला अस्पताल पहुंचते हैं या निजी अस्पतालों में जाने को विवश होते हैं।
वरिष्ठ स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ अरविंद सिंह बताते हैं कि आपरेशन बाद 48 घंटे मरीजों के लिए सर्वाधिक महत्वपूर्ण होते हैं और इस अवधि में पूरी तरह डाक्टरी निगरानी की जरूरत होती है। क्यों कि सर्जरी बाद रक्तस्राव अधिक होने, बीपी कम होने से मरीज बेहोशी की हालत तक पहुंच सकता है। इसी लिए मरीज को 24 घंटे बाद ही वार्ड में शिफ्ट कर हर दो घंटे पर बीपी, पल्स आदि की जांच भी जरूरी है।
तृतीय तल पर मरीज व तीमारदारों को पेयजल समस्या से भी जूझना पड़ता है। पीने के लिए पानी भूतल पर ही मिलता है। सायंकाल चार बजे के बाद लिफ्ट बंद होने से तीमारदार का नीचे जा कर पानी भरकर लाना बड़ी परेशानी बनता है। परिसर में चल रहे निर्माण कार्य को जलापूर्ति बाधित होने का कारण बताया जाता है। सायंकाल लिफ्ट बंद होने के पीछे लिफ्टमैन की तैनाती न होना कारण है।
जिला महिला अस्पताल के सीएमएस डॉ. एसके शुक्ला ने बताया कि यदि चिकित्सक वार्ड का नियमित तौर से राउंड नहीं ले रहे तो इसकी जांच कराकर कार्रवाई होगी। लिफ्टमैन न होने से शाम को लिफ्ट का संचालन बंद कर दिया जाता है। कर्मचारी की तैनाती के साथ ही बाधित जलापूर्ति को जल्दी दुरुस्त बनाने का निर्देश दिया गया है।
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