राहगीर नाक पर रुमाल रखकर चलने के लिए मजबूर हैं। हवा में घुली दुर्गंध कई संक्रामक बीमारियों को जन्म दे सकती हैं। मेला क्षेत्र को पांच सेक्टरों में बांटा गया था। चार क्षेत्रों के सफाई का जिम्मा स्वास्थ्य विभाग को सौंपा गया था।
मेला क्षेत्र के सफाई के लिए काफी जद्दोजहद होती रही। लेकिन अयोध्या मैली रही रह गई। पूर्णिमा स्नान के बाद रविवार को सबसे खराब हालत रामघाट से छोटी छावनी जाने वाले मार्ग की है।
इस मार्ग पर सड़क के किनारे गंदगी इस कदर फैली है कि आम आदमी चल नहीं चल सकता था। ऐसा ही कुछ हाल कच्चा घाट का है। इतनी गंदगी है कि श्रद्धालु सामान्य हालत में घाट तक नहीं जा सकते हैं।
ऋणमोचन घाट, गोला घाट, मणिराम दास छावनी, तुलसी उद्यान, प्रमोद वन, रामघाट, वासुदेवघाट मीरापुर वार्ड में कूड़ा पटा हुआ है। श्रृंगारहाट और वासुदेवघाट पर नाली का पानी सड़क पर बह रहा है।
मीरापुर वार्ड भी अपनी बदहाली पर आंसू बहा रहा है। स्वर्गद्वार मोहल्ले का हाल और ही बदतर है। इस मोहल्ले में सफाई कर्मचारी नजर ही नहीं आ रहे हैं, लेकिन यह बस अधिकारियों को नहीं दिख रहा है।
प्रभारी सीएमओ डॉ. एके सिंह का कहना है कि मेला क्षेत्र में जहां भी गंदगी है वहां सफाई की जा रही है। अयोध्या को नीट एंड क्लीन कर नगरपालिका को सौंपी जाएगी।
यदि नगरपालिका नियमित रूप से सफाई करती रही तो मेला क्षेत्र में किसी प्रकार की संक्रामक बीमारी नहीं फैलेगी।
चेयरमैन नगरपालिका अयोध्या राधेश्याम गुप्त बोले कि स्वास्थ्य विभाग सिर्फ कागजों में ही सफाई कर रहा था। यदि नियमित सफाई होती तो अयोध्या में इस प्रकार की गंदगी नहीं दिखती।