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सूखे की आहट से अन्नदाता परेशान

Sun, 30 Aug 2015 11:48 PM IST
फैजाबाद/अमर उजाला ब्यूरो
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लाचार किसानों को अब भादो मास बारिश का इंतजार है। उधर, प्रशासन की ओर से बिजली, सिंचाई के साधनों समेत सूखा से निपटने की कोई फिक्र नहीं दिखती।
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जिले में धान की खेती तकरीबन 95 हजार हेक्टेयर क्षेत्र पर की गई है। प्रति हेक्टेयर 29 क्विंटल धान पैदा होने की संभावना रहती है। लेकिन अब यह मौसम की विपरीत परिस्थितियों के कारण आंकड़े को छू पाना मुश्किलों भरा है।

जिले के विभिन्न क्षेत्रों में गन्ने की खेती तकरीबन 58 हजार हेक्टेयर भूमि पर हुई है। सदर तहसील का मांझा क्षेत्र व तारुन, बीकापुर इलाका गन्ने का बेल्ट माना जाता है।
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प्रति हेक्टेयर जमीन पर औसतन गन्ने की पैदावार 733 क्विंटल होती है। लेकिन गन्ने की फसल को पर्याप्त पानी नहीं मिल पाने के कारण इसके कुल प्रस्तावित उत्पादन में गिरावट की आशंका जताई जा रही है।

जून व जुलाई माह में हुई बारिश पर गौर किया जाए तो धान की फसल के लिए जितने पानी की जरूरत रहती है। उसका आधा पानी भी नहीं बरसा है। किसान अपनी धान की फसल बचाने के लिए बेहतर कल की आस में सिंचाई कर रहा है।

अमूमन धान की फसल के लिए जून में 106 मिमी पानी की जरूरत बताई जाती है। लेकिन 19 मिमी ही बारिश रिकॉर्ड की गई थी। जुलाई भी किसानों के उम्मीदों पर खरा नहीं उतरा।

इस माह में धान की फसल के लिए 306 मिमी पानी की दरकार होती है। इसके सापेक्ष 257 मिमी बरसात हुई। सदर तहसील क्षेत्र के कुछ गांवों को छोड़ दे अन्य जगहों पर न तो खेतों में पानी है और न ही तालाब व छोटे-मोटे गड्ढों में बरसात के  मौसम की तरह पानी दिख रहा है।

अगस्त में अभी तक लगभग 50 मिमी बरसात बताई जा रही है। जिसके कारण धान की फसलों को समुचित पानी नहीं मिल पा रहा है। औसत से काफी कम हो रही बारिश के बावजूद सूखे को लेकर प्रशासन की कोई तैयारी नहीं दिख रही है। अभी तक बारिश कम होने से उपजे हालात को लेकर बैठकें तक नहीं हो रही है।  

अमारी गांव के ओमनाथ ने कहा कि एक तो बरसात ठीक से नहीं हुई और ऊपर से बिजली ने भी दगा दे दिया। इसके कारण धान की सिंचाई पर्याप्त नहीं हो सकी है। किसानों की चिंता सिर्फ कागजों में दिखती है।

महाराजीपुर गांव के शैलेंद्र सिंह ने कहा कि सिंचाई की व्यवस्था तो हमने कर रखी है। लेकिन डीजल से खेतों की सींचकर धान पैदा करना बहुत महंगा है। बारिश कम होने के कारण धान की पैदावार प्रभावित होगी।

कुलवंत का पुरवा के बुजुर्ग किसान शत्रुघन ने उदास हो कहा कि पानी उतना बरसा ही नहीं कि धान की खेती लाभ देगी। कही से कोई राहत नहीं, सब कुछ भगवान भरोसे ही है।

रऊवा लोहंगपुर के धीरेंद्र ने बताया कि धान की खेती तो इस बार चौपट हो गई। खेतों की डीजल से सिंचाई कर कब तक धान बचाया जाएगा।


नरेंद्रदेव कृषि विज्ञान केंद्र के प्रशिक्षण संयोजक डॉ. मिथिलेश पांडेय कि किसान अभी इंतजार करे। यदि बरसात होती है तो अच्छा है। नहीं तो असिंचित क्षेत्रों में अगैती उड़द, मसूर, मूंग, लाही की खेती कर धान की खेती में हुए घाटे को कम कर सकते है।
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जिला कृषि अधिकारी डॉ. राजेश कुमार यादव ने कहा कि अभी तक अपेक्षित बरसात नहीं हुई है। इससे धान की खेती प्रभावित हो रही है। यदि कुछ दिन और बरसात नहीं हुई तो जिले में पूरी तरह से सूखा पड़ जाएगा। सूखा पड़ने पर निश्चित तौर पर किसानों के लिए राहत के इंतजाम किए जाएंगे।
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