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डिजिटल माध्यमों से रामनगरी की पौराणिक विरासत से रूबरू होंगें भक्त

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अयोध्या। राममंदिर के लिए नींव खोदाई का काम तेजी से चल रहा है। रामजन्मभूमि परिसर के विस्तार की कवायद भी तेज हो गई है। राममंदिर का परिसर अब 70 एकड़ से बढ़कर 108 एकड़ का होगा।
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इसके लिए रामजन्मभूमि के आसपास की जमीनों की खरीद को लेकर ट्रस्ट भू-स्वामियों से वार्ता कर रहा है। ट्रस्ट के अनुसार राममंदिर में आधुनिकता के साथ पौराणिकता की भी दिव्य झलक दिखेगी।
रामलला के भक्त डिजिटल माध्यमों से रामनगरी की पौराणिक विरासत से रू-ब-रू हो सकेंगे। रामजन्मभूमि परिसर का मास्टर प्लान तैयार हो चुका है। यात्री सुविधाओं के मद्देनजर कई प्रकल्प स्थापित किए जाएंगे जो आधुनिक सुविधाएं से लैस होंगे।
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वहीं दूसरी तरफ रामनगरी की पौराणिक विरासत व ऐतिहासिक धरोहरों को भी सहेजे जाने की योजना है। आर्षग्रंथों के आधार पर श्रीराम का कालखंड 10 हजार वर्ष पूर्व माना गया।
इसी पौराणिक विरासत को आधुनिक तकनीक से जोड़कर लोगों को परिचित कराया जाएगा। इसके लिए डिजिटल माध्यमों का प्रयोग किया जाएगा। इसी थीम को ध्यान में रखकर मुक्ताकाशी मंच व लेजर शो के लिए स्थान तय किया गया है।
प्रोजेक्शन थिएटर के जरिए रामदरबार की भव्य आकृति भक्तों के लिए श्रद्धा का केंद्र होगी। परिसर में सत्संग भवन में रामायण व श्रीमद भागवत की कथाओं के माध्यम से भगवान का गुणगान सुनने के साथ-साथ मंच, भक्तों-श्रोताओं के बैठने के लिए एलईडी स्क्रीन युक्त सभागार की भी व्यवस्था की जाएगी।
बहुआयामी चलचित्रशाला भी मंदिर को आधुनिक रूप प्रदान करेगी। रामजन्मभूमि परिसर में रामलला के मुख्य मंदिर के साथ ही पूर्व में ही जनकनंदिनी माता सीता देवी का मंदिर होगा। कुबेर टीला पर स्थित शेषावतार मंदिर का भी निर्माण कराया जाएगा।
वर्ष 1992 में जुलाई से नवंबर के मध्य शेषावतार मंदिर श्रीरामजन्मभूमि न्यास द्वारा बनाया गया था। आंध्र प्रदेेश के वास्तु विशेषज्ञों के परामर्श के अनुसार दक्षिण-पश्चिम कोने को ऊंचा रखा गया और लक्ष्मणजी के मंदिर की कल्पना की गई।
राममंदिर में उसी कल्पना को साकार करने की योजना है। जन्मभूमि के पूर्व दिशा में स्थित सीता कूप को दर्शनीय बनाए जाने के साथ यहीं पर गौशाला की स्थापना की जाएगी। सिंहद्वार के सम्मुख द्वीप स्तंभ की भी स्थापना की जाएगी।
राममंदिर में प्रकाश के लिए जहां आधुनिक लाइटें लगाईं जाएंगी। राममंदिर परिसर सौर ऊर्जा से भी रोशन होता रहेगा। राममंदिर के दूसरे मंजिल पर राम दरबार की स्थापना की जाएगी, यहां तक जाने के लिए मंदिर में स्वचालित सीढ़ियां लगाई जाएंगी।
राममंदिर में कुल 12 द्वार बनाने की योजना है। चारों दिशाओं में अलग-अलग नामकरण के साथ द्वार भी बनाए जाएंगे जिसमें पूर्व का द्वार हनुमत द्वार होगा। यह मुख्य मंदिर का द्वार भी रहेगा।
इसके अलावा पश्चिम में नल द्वार व दक्षिण में अंगद द्वार व उत्तर में सरयू द्वार की भी कल्पना की गयी है। नल द्वार के ही निकट दक्षिण-पूर्व दिशा में सिक्योरिटी कंट्रोल रूम, सिक्योरिटी क्लॉक रूम, सेंट्रलाइज्ड वाटर फिल्टर प्लांट, मल्टीलेवल पार्किंग, पब्लिक लाइब्रेरी, इत्यादि का प्रबंध रहेगा।
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